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मंत्री श्री शुक्ल ने सिंहस्थ प्रचार मोटर साइकिल रैली को किया रवाना


सिंहस्थ समागम का देश-विदेश में मोटर साइकिल यात्रा से प्रचार-प्रसार

जनसंपर्क, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपने निवास से सिंहस्थ-2016 के प्रचार-प्रसार के लिये देश-विदेश में जाने वाले सिंहस्थ आमंत्रण मोटर साइकिल रैली के द्वितीय चरण के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क श्री अनुपम राजन, अपर संचालक श्री मंगला मिश्रा मौजूद थे।
श्री शुक्ल ने कहा कि देश सहित पूरी दुनिया में सिंहस्थ का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था और आध्यात्म के विश्व के सबसे बड़े समागम सिंहस्थ का आयोजन प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में किया जा रहा है। जनसंपर्क मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा अनुरूप इस आयोजन को एतिहासिक बनाने के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा सभी प्रचार माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। श्री शुक्ल ने कहा कि सिंहस्थ समागम के दौरान उज्जैन में वैचारिक महाकुंभ भी होगा। इसके जरिये मानव-कल्याण और पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दुनिया में जन-जन तक पहुँच सकेगा।
मंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि ये मोटर साइकिल दल भोपाल से 16 मार्च से 22 अप्रैल 2016 तक भारत के 7 राज्य, 40 प्रमुख शहर एवं नेपाल में पहुँचकर करीब 12 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सिंहस्थ के संदेश को प्रसारित करेगा। यह दल भोपाल से रवाना होकर होशंगाबाद, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, (म.प्र.) दुर्ग, भिलाई, रायपुर (छ.ग.) भुवनेश्वर, जगन्नाथपुरी, राऊरकेला (उड़ीसा) जमशेदपुर, रांची (झारखंड), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), पटना, मोतीहारी (बिहार), काठमाण्डू, (नेपाल), गोरखपुर, जौनपुर, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद (उ.प्र.) तथा सीधी, रीवा, खजुराहो, सागर, भोपाल एवं उज्जैन में सिंहस्थ आमंत्रण का संदेश देगा।
दल के प्रभारी उज्जैन के युवा श्री अमन मिश्रा ने बताया कि सिंहस्थ मोटर साइकिल रैली के द्वारा प्रथम चरण में 27 नवम्बर 2015 से 15 फरवरी 2016 तक 15 राज्य तथा 50 प्रमुख शहर में 19 हजार 500 किलोमीटर यात्रा तय की गई थी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 27 नवम्बर को रैली को रवाना किया था। दल ने अपनी यात्रा के दौरान भोपाल, देवास, उज्जैन, मंदसौर, नीमच (म.प्र.) नीमबाड़ा, भीलवाड़ा चित्तौड़गढ़, अजमेर, पुष्कर, जयपुर, (राजस्थान) दिल्ली और एन.सी.आर, गुना, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, आगरा, गाजियाबाद, (उ.प्र.) हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, (उत्तराखण्ड) पोन्टा साहिब (हिमाचल प्रदेश) कुरूक्षेत्र, अंबाला, हरियाणा, अमृतसर, अटारी (पंजाब), श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, सिरोही, माऊंटआबू (राजस्थान), अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत (गुजरात), सिलवासा (दमन दीव), मुम्बई, पुणे, कोल्हापुर (महाराष्ट्र), गोवा, पणजी, उड्डूपी, जोगप्रपात मैंगलुरू, (कर्नाटक), कोच्चि एरनाकुलम, तिरूवनंतपुरम, (केरला), कन्याकुमारी, एटियापुरम, रामेश्वरम एवं मदुरई (चेन्नई) पहुँचकर सिंहस्थ-2016 का प्रचार-प्रसार किया था।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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