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खनिज राजस्व प्राप्ति के ठोस और सार्थक पहल करें – खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल


अवैध खनन तथा परिवहन पर रोक लगाये
खनिज मंत्री श्री शुक्ल की अध्यक्षता में परामर्शदात्री समिति की बैठक

खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मुख्य खनिजों के अलावा गौण खनिजों से राजस्व बढ़ोत्री के ठोस प्रयास किये जाये। उन्होंने कहा कि खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण को सख्ती से रोका जाये। श्री शुक्ल आज यहाँ विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में समिति सदस्य विधायक सर्वश्री डॉ. गोविंद सिंह, संजय पाठक, लखन पटेल, श्रीमती शंकुतला खटीक एवं श्रीमती प्रतिभा सिंह मौजूद थे।

श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास में खनिज की भूमिका महत्वपूर्ण है। खनिजों से राजस्व प्राप्ति पर पर्याप्त ध्यान दिया जाये। रेत-खदानों की नीलामी शीघ्र पूर्ण की जाये। नीलाम खदानों की औपचारिकताएँ शीघ्र पूर्ण कर अनुबंध किया जाये। कुम्हारों, पंचायतों एवं जल उपभोक्ता संथाओं को निर्माण कार्यों के लिए आसानी से रेत मिलने की व्यवस्था की जाये।

बैठक में समिति सदस्यों ने खनिजों के अन्वेषण तथा दोहन, अवैध उत्खनन पर रोक, शासन को मिलने वाली आय में बढ़ोत्री से संबंधित सुझाव दिये।

सचिव खनिज साधन श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि खनिजों की नीलामी ई-ऑक्शन से की जा रही है। खनिज परिवहन के वाहनों का ई-पंजीयन किया जा रहा है। ई-ट्रांजिट पास का परीक्षण चल रहा है। विभाग द्वारा सतना जिले में दो तथा दमोह जिले में एक चूना पत्थर ब्लॉक ई-नीलामी के लिए चिन्हित किया गया है।

संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म श्री विनीत ऑस्टिन ने बताया कि वर्ष 2014-15 में 3400 करोड़ के विरूद्ध 3477 करोड़ का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ था। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3550 करोड़ के लक्ष्य के विरूद्ध 2732 करोड़ का खनिज राजस्व प्राप्त हो चुका है।

कार्यपालक संचालक खनिज विकास निगम श्री तरूण राठी ने बताया कि राज्य खनिज निगम के 324 रेत खदानों के समूह में से 263 समूह में नीलामी स्वीकृत हो चुकी है।

बैठक में खनिज विभाग, संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म तथा राज्य खनिज विकास निगम के अधिकारी उपस्थित थे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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