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अब राम मंदिर भी क्या कांग्रेस बनवायेगी ? बस ऐसे ही पूछ लिया

अब तो आम लोग भी कहने लगे हैं कि क्या राम मंदिर भी कांग्रेस बनवायेगी? कांग्रेस के ही समय मंदिर का ताला खुला, विवादित ढांचा गिरा तो क्या मंदिर भी कांग्रेस की सरकार के समय बनेगा।यह मासूम सा सवाल किसी बड़े पंडितों के बीच में नहीं होता है बल्कि पान की दुकान में खड़े लोगों के बीच सामान्य लोगों के बीच से आ रहा है ।
राम मंदिर मुद्दा सर के ऊपर पानी होने जैसी वाली स्थिति में पहुंच गया है ।लोगों की जुबानी अगर यकीन किया जाए तो न्यायालय के तारीख पर तारीख और इसे अपनी प्राथमिकता की सूची में ना रखना और केंद्र सरकार का यह कहना है कि हम न्यायालय के फैसले का इंतजार करेंगे अब लोगों की सहनशक्ति से ऊपर हो चुका है ।एक कहता है कि  यह हमारी प्राथमिकता नहीं है और दूसरा कहता हैं कि हम आपकी प्राथमिकता को  मानेंगे ।अब हालात ऐसे हो चले हैं कि वर्तमान सरकार अगर कुछ कदम मंदिर के पक्ष में उठाती है तो जनता को उस पर कुछ उम्मीद बनेगी और अगर समय चूकने के बाद कोई काम किया जाएगा तो उसका लाभ इनको नहीं मिल पाएगा।
अभी 11-12 जनवरी को दिल्ली रामलीला मैदान मे भाजपा का राष्ट्रीय सम्मेलन था यहां पहुंचे कार्यकर्ता भी सबसे ज्यादा जय श्रीराम का नारा ही बुलंद करते रहे हैं।
 भाजपा कार्यकर्ता की क्षेत्र मे हालत तब खराब हो जाती है जब लोग कहते हैं कि सरकार एट्रोसिटी एक्ट पर तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अध्यादेश ले आती है लेकिन राममंदिर मुद्दे पर कहते हैं कि अध्यादेश नही लायेंगे सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय मानेंगे।
 दूसरी ओर जो लोग कह रहे हैं कि राम मंदिर भी कांग्रेस बनायेगी अपने तर्क मे कहते हैं कि  सोमनाथ भी तो कांग्रेस के समय ही बना था तो राम मंदिर भी कांग्रेस ही बनायेगी।
यह बात तार्किक रूप से ठीक नही लग सकती लेकिन राजनैतिक लाभ के लिए फायदेमंद तो हो ही सकती है।कांग्रेस भी उत्साहित है पांच राज्यों के चुनाव में तीन राज्य जो भाजपा शासित थे उनमे पूरी ताकत और धमक के साथ कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की है ।एनडीए के कुनबे मे जहां खींचतान हो रही है वहीं यूपीए का कुनबा बढ़ रहा है। कांग्रेस सरकार को संसद में घेरने में भी कामयाब हो पा रही है ।भाजपा के कई बड़े नेता अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर उंगली उठा रहे हैं ।बड़े नेताओं के व्यवहार से पार्टी के पुराने नेताओं मे असंतोष  है ।ऐसे में राम मंदिर भी कांग्रेस ही बनायेगी का प्रचार लगता है कांग्रेस के द्वारा ही किया जा रहा है।  राहुल का मंदिर जाना,जनेऊ पहनना ,त्रिपुंड  लगाना,भजन गाने लग जाना अकारण नहीं है। इस पूजा पाठ से इन्होने 3 राज्यों का प्रसाद भी खा लिया है तो केंद्र की सत्ता पर आने के लिए जैसे भाजपा ने राम के नाम का सहारा लिया तो अब कांग्रेस वह सहारा ले ले तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए ।
ऐसा लगता है कि कांग्रेस के रणनीतिकारों ने राम मंदिर मुद्दे को इस लिहाज से जनमानस के बीच उछाल दिया है कि वर्तमान सरकार इस विषय पर केवल जुमलेबाजी कर रही है और हम इस पर ठोस कदम उठाएंगे ।जनता की याददाश्त लम्बी होती नही ।कांग्रेस का मानना यह है कि आज हम आपने पक्ष की बातों का ऐसा प्रचार करें कि लोग वर्तमान याद रखें।कांग्रेस के नेता जो बाबरी मस्जिद के पक्ष में केस लड़ रहे हैं उनके लिए कांग्रेस का कहना है कि कांग्रेस नहीं लड़ रही बल्कि वह तो वकील है।
 साधु संतों का भी एक बड़ा वर्ग  भाजपा से रुष्ट होकर इनके पक्ष में आ खड़ा हुआ है ।जो पिछले साल तक प्रधानमंत्री के नीयत पर किसी तरह का शक नहीं करते थे वह लोग अब अन्य नेताओं और सरकारों के कार्यों से इनकी तुलना करने लगे हैं। यही मतदाताओं के हिलने ढुलने  की प्रवृत्ति मोदी सरकार के लिए कुछ नुकसानदायक हो सकती है। लोगों का कहना है कि आपने  जो कहा है वह करो अगर राम मंदिर की बात थी तो राम मंदिर बनना चाहिए सरयू के तट पर विशाल राम मूर्ति बने वह अच्छी बात है वह बोनस हो सकता है लेकिन मूल तो राम मंदिर ही है उस पर समझौता नही ।
अब अगर निष्पक्ष रुप से देखा जाए तो जो कांग्रेस देश में उपस्थिति हीनता की ओर बढ़ गई थी वह पुनर्वापसी कर रही है ।वहीं भाजपा को अपनी यथास्थिति बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। सवर्ण आरक्षण भी उसी मेहनत का परिणाम है।यह कुछ ऐसा ही है कि जरूरत किसी और वस्तु की है  दी दूसरी जा रही है। जिसको मिल रही है वह कहता है यह तो ठीक है मगर वह कब मिलेगी जिसकी बात हुई थी। राम मंदिर भाजपा के लिए कुछ ऐसा ही मुद्दा है। लोगों का कहना है कि 2014 की तरह कांग्रेस से नफरत और भाजपा से प्यार अब लोगों मे 2019 में नहीं दिख रहा है ।आज स्थित कुछ ऐसी है कि ” वो जो  इश्क था वो जुनून था ,ये जो हिज्र है वो नसीब है “।2014 अगर इश्क था तो 2019 हिज्र हो सकता है। अब देखने वाली बात यह है कि आज की तारीख में इश्क और हिज्र किसके  नसीब में आएगा वो तो समय ही बताएगा ।एक तरफ मोदी सरकार के जन हितैषी कार्य हैं तो साथ मे  वादे और जुमले भी हैं।  दूसरी तरफ है आस्था का विषय राम मंदिर । केंद्र मे आज कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नही है ऐसे मे अगर राम मंदिर भी कांग्रेस बनवायेगी यह जुमला चल निकला तो सत्ताधारी दल के लिए परेशानी खड़ी हो जायेगी। अब यह बात चाहे व्यंग्य ही हो लेकिन बात तो चल ही निकली है।
अजय नारायण त्रिपाठी ” अलखू “

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