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पचमठा रीवा से चली एकात्म यात्रा का भोपाल में हुआ आत्मीय स्वागत


राजस्व मंत्री श्री गुप्ता आदि ने शंकराचार्य की चरण-पादुका लेकर यात्रा की

राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने शनिवार को बाणगंगा में आदि शंकराचार्य की चरण-पादुका और ध्वज का पूजन कर एकात्म यात्रा को रवाना किया। यह यात्रा 19 दिसम्बर को पचमठा रीवा से चलकर भोपाल पहुँची है। श्री गुप्ता सिर पर आदि शंकराचार्य की चरण-पादुका रख यात्रा में शामिल हुए। यात्रा का जगह-जगह पुष्प-वर्षा कर शहरवासियों ने स्वागत किया। यात्रा में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ध्वज लेकर चल रहे थे।

अम्बेडकर जयंती पार्क में जन-संवाद

एकात्म यात्रा के पंचशील नगर स्थित अम्बेडकर जयंती पार्क पहुँचने पर जन-संवाद किया गया। जन-संवाद में विभिन्न वार्डों से आई कलश-यात्रा भी शामिल हुईं।

जन-संवाद में श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि धर्म की मर्यादाओं का पालन करने पर देश का कल्याण होता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन-काल में राजा किसी अन्य दण्ड नहीं सिर्फ धर्म-दण्ड से ही दण्डित हो सकता था। श्री गुप्ता ने बताया कि आदि शंकराचार्य ने देश की एकता और अखण्डता के लिये ही देश के चारों कोनों में मठ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं से सीख लें और देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखें।

गौ-संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष एवं महामण्डलेश्वर अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने वाली हमारी आध्यात्मिक परम्परा है। उन्होंने बताया कि आदि शंकराचार्य ने अद्वैतवाद का दर्शन पूरे विश्व को दिया है। आदि शंकराचार्य को गुरु की उपाधि ओंकारेश्वर में मिली थी, इसीलिये यहाँ इनकी विशाल प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। एकात्म यात्रा 22 हजार ग्राम-पंचायतों और 52 हजार गाँवों से होकर गुजरेगी। महंत श्री चन्द्रमादास महाराज ने भी विचार रखे।

खनिज निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे ने यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। जन-संवाद के पहले मंत्रोच्चार के साथ पादुका, ध्वज और कन्या-पूजन किया गया। जन-समुदाय को एकात्मता का संकल्प दिलाया गया।

जन-संवाद में बैंगलुरु से आये स्वामी श्रीनिवास एवं अन्य साधु-संत, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग, महापौर श्री आलोक शर्मा, सांसद श्री आलोक संजर, विधायक श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह, पूर्व महापौर श्रीमती कृष्णा गौर, नगर निगम के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह चौहान एवं नागरिक उपस्थित थे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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