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उद्योग मंत्री ने क्रिकेट प्रतियोगिता के विजेताओं को किया पुरस्कृत जीत से खुशी तथा हार से सीख मिलती है – मंत्री श्री शुक्ल


राष्ट्रीय एकता परिषद संस्था द्वारा  स्व. भैयालाल शुक्ला स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का समापन उद्योग वाणिज्य तथा खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने किया। उन्होंने प्रतियोगिता की विजेता टीम रीवा हार्ट को चमचमाती ट्राफी प्रदान की उप विजेता मिश्रा क्लब चाकघाट को भी पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में 32 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता 18 दिसम्बर से 7 जनवरी तक आयोजित की गयी।
इस अवसर पर मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मेरे पिता स्व. भैयालाल शुक्ल की स्मृति में शहर में शानदार क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। इस प्रतियोगिता को अखिल भारतीय स्तर पर कराने का प्रयास किया जायेगा। लेकिन स्थानीय खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में पूरे अवसर दिये जायेंगे। मंत्री ने विजेता तथा उप विजेता टीमों को बधाई देते हुए कहा कि जीत से हमें खुशी मिलती है तथा हार से सीख मिलती है। हारने का बाद ही हमें जीतने का सुख मिलता है। खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में पूरी खेल भावना खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सुन्दर नगर से चौबेन टोला होते हुये करहिया के लिए दस मीटर चौड़ी रोड बनायी जायेगी। इसका निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा।
समारोह में महापौर श्रीमती ममता गुप्ता ने कहा कि प्रतियोगिता में अच्छे खेल का प्रदर्शन हुआ। खेल की तरह जीवन में भी चुनौतियां मिलती हैं जिनका सामना करके हम आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री जी के मार्गदर्शन में रीवा में विकास के कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। समारोह में मोहन लाल तिवारी ने स्व. भैयालाल शुक्ल स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता को अखिल भारतीय प्रतियोगिता बनाने का सुझाव दिया। समारोह में स्वामी संतशरण महाराज तथा अविनाश शुक्ला ने भी अपने विचार व्यक्त किये। समारोह का समापन विवेक दुबे द्वारा आभार प्रदर्शन से हुआ। समारोह में राजेन्द्र गौतम, विवेक मिश्रा, सतीश सोनी, राजीव पाण्डेय, अखिलेश शुक्ला तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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