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भावांतर भुगतान योजना किसानों का सुरक्षा कवच है – उद्दोग मंत्री श्री शुक्ल


रीवा में 484 किसानों को मिली भावांतर की साढ़े 43 लाख से अधिक राशि

कृषि महाविद्यालय रीवा में आयोजित किसान सम्मेलन में किसानों को भावांतर भुगतान योजना के प्रमाण पत्र वितरित किये गये। सम्मेलन के मुख्य अतिथि उद्योग, वाणिज्य तथा खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने किसानों को भावांतर राशि के प्रमाण पत्र प्रदान किये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भावांतर भुगतान योजना किसानों का सुरक्षा कवच है। अच्छी फसल होने पर बाजार में यदि उपज के मूल्य में कमी आती है तो भी किसान को अच्छा लाभ मिलेगा। सरकार उसे माडल रेट के आधार पर भावांतर की राशि का भुगतान कर रही है। पूरे प्रदेश में लाखों किसानों को 22 सौ करोड़ से अधिक राशि का भावांतर भुगतान किया जा रहा है। रीवा जिले के 484 किसानों को 43 लाख 56 हजार रूपये की राशि का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा रहा है।
समारोह में मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने तथा किसानों को सुरक्षा देने के लिए भावांतर योजना लागू की है। अब इस योजना को देश के दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना का लाभ आगामी फसल जैसे चना, अलसी, मसूर तथा जौ में भी दिया जायेगा। प्रधानमंत्री जी ने गेंहू के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की घोषणा की है। खेती के विकास के लिये रीवा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। बाणसागर का पानी गांव-गांव पहुंच रहा है। जिसके फलस्वरूप रीवा में अब तक एक लाख 26 हजार टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा चुकी है। यह आंकड़ा 1.5 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
मंत्री ने कहा कि सभी किसान अपनी फसलों का बीमा अवश्य करायें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से उन्हें प्राकृतिक आपदा में फसल हानि से सुरक्षा मिलेगी। गत वर्ष लगभग तीन हजार किसानों ने बीमा कराया था। फसल हानि होने पर 11 करोड़ रूपये का बीमा लाभ मिला है। यदि सभी किसानों ने फसल बीमा कराया होता तो यह लाभ सौ करोड़ से अधिक होता। समारोह में महापौर श्रीमती ममता गुप्ता ने कहा कि बाणसागर की नहरों से 2.5 लाख एकड़ में सिंचाई की सुविधा मिली है। इससे पूरे क्षेत्र के किसानों के भाग्य संवर गये हैं। सम्मेलन में मण्डी अध्यक्ष हनुमना तथा राम सिंह ने भावांतर योजना के लाभ की जानकारी दी।
सम्मेलन में कलेक्टर श्रीमती प्रीति मैथिल नायक ने कहा कि बाजार में अनाज के दामों में उतार-चढ़ाव होने पर किसान को संकट का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना ने किसान के इस सकंट को दूर किया है। सभी किसान भावांतर योजना का लाभ लेने के लिये पंजीयन करायें। इसके साथ-साथ सभी किसान 15 जनवरी तक फसल बीमा भी अनिवार्य रूप से करायें। सभी अऋणी किसान भी नाममात्र की राशि देकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
सम्मेलन में हुआ मुख्यमंत्री के भाषण का सजीव प्रसारण – किसान सम्मेलन में टीकमगढ़ के पृथ्वीपुर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के उद्बोधन का सीधा प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री ने समय पर ऋण न चुका पाने वाले डिफाल्टर किसानों के लिये समाधान योजना शीघ्र प्रारंभ करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डिफाल्टर किसान को केवल ऋण राशि देनी होगी। ब्याज की राशि का भुगतान सरकार करेगी।
सम्मेलन में वितरित हुए भावांतर राशि प्रमाण पत्र – सम्मेलन में मंत्री श्री शुक्ल ने किसानों को भावांतर भुगतान योजना की भावांतर राशि के प्रमाण पत्र प्रदान किये। सम्मेलन में राम सिंह को 5000 रूपये, श्रीमती शांति चतुर्वेदी को 42000 रूपये, सौखीलाल 3034, रामयस पटेल 17819, दिनेश सिंह 3560, गोविंदशरण द्विवेदी 11789, पुष्पेन्द्र सिंह 6894, पंकज सिंह 14300 तथा रमाकांत को 28389 रूपये की भावांतर राशि का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। राशि किसानों के बैंक खाते में दी जा रही है।
दी गई फसल बीमा की जानकारी – सम्मेलन में संयुक्त संचालक कृषि, उप संचालक कृषि तथा समन्वयक कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों को भावांतर भुगतान योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी दी। सम्मेलन में विधानसभा की कृषि समिति के सदस्य रघुराज तिवारी, मण्डी अध्यक्ष छोटेलाल कोल, राजेश पाण्डेय तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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