समाचार

विकसित राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रतिभा का योगदान दें – राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली


23 दिसम्बर रीवा

शिक्षा नैतिक मूल्य से अलग न हो, शिक्षा का सदुपयोग परमार्थ के लिये हो-उद्दोग मंत्री

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का 6 वां दीक्षांत समारोह राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधिपति गुवाहाटी हाईकोर्ट श्री अजीत सिंह, शास्त्रीय गायक पं. छन्नूलाल मिश्र, अध्यक्ष इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कलाकेन्द्र श्री रामबहादुर राय व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग श्री नंदकुमार साय को मानद उपाधि प्रदान की। साथ ही विभिन्न संकायों के स्वर्णपदक एवं उपाधियां भी राज्यपाल द्वारा उपाधि धारकों को प्रदान की गयीं।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली ने कहा कि भारत को विकसित बनाने में सभी अपनी प्रतिभा का योगदान करें तभी उच्च शिक्षा अपने उद्देश्यों में सफल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिये गौरवपूर्ण प्रसंग होता है। इसका नियमित आयोजन होना चाहिए। विश्वविद्यालय तभी पूर्ण माने जायेंगे जहाँ नवीन ज्ञान का सृजन होने के साथ ही सृजित ज्ञान आने वाली पीढ़ी को देने का कार्य किया जाय। उन्होंने अपेक्षा की कि वातावरण निर्माण से विश्वविद्यालय विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हो सकेंगे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों व संस्थानों में नाम स्थापित करेंगे ताकि विश्व के अन्य देशों से छात्र भारत के संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के लिये आयें।


राज्यपाल ने कहा कि छात्रों में सृजनशीलता व संवेदनशीलता होनी चाहिए ताकि वह नवाचार कर समाज के लिये अपना योगदान दे सकें। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि छात्रों के साथ शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त भी संवाद व समन्वय बनायें। शिक्षा को परंपरा व आधुनिकता से जोड़ने पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि इससे हम जहाँ भारतीयता से जुड़ेंगे वहीं विकास के नित नये आयाम प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का मानना है कि व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण आत्म विश्वास है। इसलिए गुरूजनों व विद्यार्थियों को इस दिशा में विचार करते हुए युवाओं के देश उत्थान में उनकी क्षमता का सदुउपयोग करना चाहिए। युवा प्रतिभाओं को रोजगार प्राप्ति के लिये शिक्षा पाठ¬क्रम में कौशल विकास को शामिल कर बाजार व रोजगार के साथ समन्वय बनाने का कार्य करना होगा। ताकि यह पाठ¬क्रम प्रासंगिक हो सकें। उन्होंने उपाधि धारकों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।


दीक्षांत समारोह में अतिथि के तौर पर उपस्थित प्रदेश के उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत के पारंपरिक परिधान में आयोजित दीक्षांत समारोह यह दिखाता है कि देश के साथ रीवा भी बदल रहा है, प्रगति कर रहा है। विवेकानंद जी द्वारा गुरू की महत्ता के संबंध में दिये गये उद्गार की चर्चा करते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि शिक्षा नैतिक मूल्य से अलग न हो, शिक्षा का सदुपयोग परमार्थ के लिये हो तथा उपाधि प्राप्त कने वाले अपनी सज्जनता की सुगंध से समाज को सुवासित करें। उन्होंने अपेक्षा की कि इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, कर्म से कीर्ति अर्जित कर सम्मान प्राप्त करेंगे।
इससे पूर्व कुलपति प्रो. के.एन. यादव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अतिथियों के दीप प्रज्जवलन के साथ गरिमामय कार्यक्रम का आरंभ हुआ। इस अवसर पर छात्राओं ने विश्वविद्यालय गीत का गायन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल सहित अतिथियों को शाल, श्रीफल व प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया। दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में दीक्षांत शोभा यात्रा अतिथि भवन से प्रारंभ होकर प्रशासनिक भवन स्थित आयोजन स्थल पं. शंभूनाथ शुक्ला सभागार पहुंची जहाँ राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली ने उपाधि, स्वर्ण पदक, कुलपति पदक सहित संकाय पदक व विभिन्न विभूतियों की स्मृति में पदक वितरित किये। उपाधि व पदकधारक भारतीय वेशभूषा में थे।
कार्यक्रम में महापौर ममता गुप्ता, विधायक मनगवां शीला त्यागी सहित कमिश्नर एस.के.पॉल, आई.जी. अंशुमान यादव, डी.आई.जी एन.पी. वरकड़े, कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक, पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार, कुलसचिव डॉ. आनन्द काम्बले, जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, पत्रकार, छात्र/छात्राएं, उपाधिधारक व उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश कुशवाहा ने किया।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...