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आदि शंकराचार्य ने देश की भौगोलिक सीमा के साथ देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा – मुख्यमंत्री


पंचमठा के विकास से पूरे जिले का विकास होगा और  चार स्थापित मठों की ही तरह पंचमठा को विकसित किया जाएगा – उद्दोग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

अद्वैत वेदांत दर्शन से होगा विश्व की समस्याओं का निराकरण – मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री ने रीवा में किया एकात्म यात्रा का भव्य शुभारंभ 

आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एकात्म यात्रा आरंभ की गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मार्तण्ड स्कूल मैदान रीवा में आयोजित समारोह में रीवा से जाने वाली यात्रा का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य ने देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा। उन्होंने देश के चारों कोनों में चार प्रमुख मठों की स्थापना की। आज भी ये मठ सनातन धर्म की आस्था का केन्द्र हैं। उनके विचारों और अद्वैत दर्शन ने भारतवर्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक संकट को दूर किया जिससे सनातन धर्म की पुन: स्थापना हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य काशी से महेश्वर जाते हुए रीवा के पचमठा आश्रम में कई दिनों तक रूके थे। उनकी ज्ञान ज्योति आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद इस क्षेत्र को मिला था। इसलिये विन्ध्य की धरा वंदनीय है। इस पचमठा आश्रम का सर्वांगीण विकास किया जायेगा। उन्होंने अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रतिपादन किया। सभी मानव ही नहीं बल्कि सभी प्राणियों में एक ब्राम्ह और एक आत्मा के दर्शन की बात कही गई है। हम सब ईश्वर की एक ही चेतना के अंश हैं। उन्होंने पूरे विश्व को परिवार बताया था। अद्वैत वेदांत दर्शन को यदि पूरा विश्व अपना ले तो आतंकवाद सहित विश्व की सभी समस्याओं का इससे निराकरण हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अद्वैत वेदांत के द्वारा ही भौतिकता की अग्नि का शमन होगा। आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एकात्म यात्रा संतों के नेतृत्व में निकाली जा रही है। यात्रा के दौरान हर गांव से मिट्टी तथा शंकराचार्य जी की प्रतिमा निर्माण के लिये धातु का संग्रहण किया जायेगा। ओंकारेश्वर में 22 जनवरी 2018 को पूरे प्रदेश से एकत्रित मिट्टी एवं धातु से प्रतिमा निर्माण का भूमिपूजन होगा। ओंकारेश्वर में अद्वैत वेदांत का केन्द्र भी बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भौतिक संसाधनों तथा अधोसंरचना के विकास के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का भी प्रयास कर रही है। संतों के आशीर्वाद से एकात्म यात्रा अपने उद्देश्य को प्राप्त करेगी।
समारोह में जगतगुरू स्वामी परमानंद जी ने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों से जन-जन को मार्गदर्शन मिलेगा। जिस तरह राजा अपने राज्य की रक्षा करने के लिये महत्वपूर्ण स्थानों पर किले का निर्माण कराते थे उसी तरह आदिगुरू शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिये चार मठों की स्थापना की है। हर व्यक्ति एकात्म यात्रा में अपना योगदान देकर शंकराचार्य के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करे। एकात्म यात्रा का नेतृत्व कर रहे संत स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने समारोह में कहा कि आदिगुरू ने ओंकारेश्वर में दीक्षा ली थी। अपने गुरू से आशीर्वाद लेकर पूरे देश में भ्रमण कर वेद का विरोध करने वालों को परास्त किया था। उनके पावन चरण से रीवा की धरती भी पावन हुई थी। जिसे वर्तमान में पचमठा आश्रम कहा जाता है। समारोह के अंत में उद्योग, वाणिज्य तथा खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सबका सौभाग्य है कि हमें एकात्म यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला। संतों के मार्गदर्शन में एकात्म यात्रा आदिगुरू शंकराचार्य के विचार जन-जन तक ले जायेगी।
चली धर्म ध्वजा – समारोह में आदिगुरू शंकराचार्य की पादुका का प्रतीक पूजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान तथा उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने धर्म ध्वजा एवं पादुका संतों को सौंपकर एकात्म यात्रा का शुभारंभ किया। पूरी यात्रा में ध्वज तथा पादुका यात्रा की अगुआई करेंगे।
पचमठा में हुआ पादुका पूजन – निकली भव्य शोभा यात्रा :- आदि गुरू शंकराचार्य ने पचमठा आश्रम में निवास किया था। प्रात: 11 बजे उद्योग मंत्री श्री शुक्ल तथा स्वामी अखिलेश्वरानंद ने पादुका पूजन करके शोभा यात्रा को आरंभ किया। पचमठा आश्रम से आरंभ होकर शोभा यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई समारोह स्थल मार्तण्ड स्कूल मैदान में समाप्त हुई। यात्रा में वेद पाठि बटुक, शंकराचार्य के स्त्रोतों का गायन करने वाले तथा हजारों भक्त शामिल रहे।
मुस्लिम समुदाय ने किया एकात्म यात्रा की शोभा यात्रा का स्वागत – एकात्म यात्रा के अवसर पर साम्प्रादायिक समुदाय और गंगा जमुनी संस्कृति का अनूठा उदाहरण दिखायी दिया। शोभा यात्रा पचमठा आश्रम से शुरू होकर मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ले में पहुंची तो उसका मुस्लिम भाइयों ने बैण्ड बाजे तथा पुष्प वर्षा करके स्वागत किया और शोभा यात्रा को चुनरी भेंट की गयी।
मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत हुये प्रतिभागी – एकात्म यात्रा के संबंध में जिले भर में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गर्इं। इनके विजताओं को मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पुरस्कार प्रदान किये। समारोह में सतीश मिश्रा, सम्भाषण, रामकृष्ण पाण्डेय, श्लोक गायन तथा आस्नी पाण्डेय चित्रकला प्रतियोगिता विजेता को दस-दस हजार रूपये का पुरस्कार दिया गया।
गूंजे भजन और नर्मदाष्टक के स्वर – समारोह में प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर ने सुमधुर भजनों से समा बांधा। श्रोता देर तक उनके भजनों पर झूमते रहे। समारोह में विश्व के एकमात्र संस्कृत बैंड ध्रुवा ने डाक्टर संजय द्विवेदी के मार्गदर्शन में शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने नर्मदाष्टक तथा शंकराचार्य के विभिन्न स्त्रोंतों का मधुर गायन प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने संतों से लिया आशीर्वाद – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समारोह मंचासीन सभी संतों तथा धर्माचार्यों का शाल श्रीफल से सम्मान कर उनसे सपत्नीक आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कन्या पूजन कर बेटियों का सम्मान किया। उन्होंने पादुका एवं ध्वज पूजन भी किया।
समारोह में रहे उपस्थित – इस भव्य समारोह में स्वामी ज्योतिर्मय आनंद, गोपालदास सच्चा बाबा, जगतगुरू रामललाचार्य, राजगुरू प्रपन्नाचार्य, सनकादिक महाराज, विजय शंकर ब्राम्हचारी पचमठा, स्वामी केशवानंद सहित धर्माचार्य, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, पिछड़ावर्ग अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के अध्यक्ष श्री प्रदीप पटेल, कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री सुल्तान सिंह शेखावत, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुभाष सिंह, सांसद जनार्दन मिश्र, महापौर ममता गुप्ता, पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह, विधायक सिरमौर दिव्यराज सिंह, विद्याप्रकाश श्रीवास्तव, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री जी की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, कमिश्नर श्री एस.के.पॉल, कलेक्टर श्रीमती प्रीति मैथिल नायक तथा हजारों श्रद्धालु एवं आमजन उपस्थित रहे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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