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मैहर में 17 करोड की लागत से विकसित होगा 34 हेक्टेयर का औद्योगिक क्षेत्र


प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को सतना जिले के मैहर विकासखण्ड के ग्राम हरनामपुर में 17 करोड रूपये की लागत से विकसित होने वाले 34 हेक्टेयर क्षेत्र के नवीन औद्योगिक क्षेत्र का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद गणेश सिंह ने की।
इस मौके पर उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र मे मैहर एक सुप्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के साथ ही सीमेन्ट कारखानो के फलस्वरूप बृहद औद्योगिक केन्द्र भी है। हरित पर्यटन और औद्यागिक क्रांति के माध्यम से इस क्षेत्र को देश का सबसे खुशहाल क्षेत्र बनायेगें। उन्होने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगो मे स्थानीय बेरोजगारो को रोजगार देने मे प्राथमिकता सुनिश्चित की जायेगी। उन्होने कहा कि बरगी की नहर को लाने सुरंग बनाने का काम रात दिन चल रहा है और अतिशीघ्र ही मैहर उचेहरा नागौद सहित सतना जिले मे लाखो हेक्टेयर क्षेत्र मे सिंचाई की सुविधा बरगी नहर के माध्यम से मिल सकेगी। उन्होने बताया कि मैहर के औद्योगिक क्षेत्र मे लगभग 1500 करोड रूपये का निवेश होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये सांसद गणेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक नगर मैहर में पूर्व मे 131 हेक्टेयर शासकीय भूमि उद्योग विभाग द्वारा अधिग्रहण की गई थी। उसी अधिग्रहीत भूमि मे से 34 हेक्टेयर भूमि ए.के.वी.एन. को औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिये आबंटित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र मे 55 लोगो ने प्लाट भी आरक्षित करा लिये है। उन्होने कहा कि मैहर क्षेत्र के इसी इलाके के बडे भूभाग मे सब्जियो का प्रचुर उत्पादन होता है। यहां फूड प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगो की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होने बताया कि मुम्बई की एक कम्पनी से इस संबंध में चर्चा भी की गई है।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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