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औद्योगिक, हरित और पर्यटन क्रांति से दूर होगी गरीबी – राजेन्द्र शुक्ल


बाबूपुर में 150 करोड से विकसित होगा 180 हेक्टेयर का औद्योगिक क्षेत्र

प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य तथा खनिज साधन मंत्री मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करना है तो वहां उद्योग पर्यटन और सिंचाई को बढावा देना होगा। विन्ध्य क्षेत्र में वाणसागर और बरगी की सिंचाई से हरित क्रांति उद्योगो की स्थापना से औद्योगिक क्रांति और इस क्षेत्र मे फोरलेन सड़को के बनने से पर्यटन क्रांति आयेगी। इन तीनो क्रांतियो से क्षेत्र का सर्वागींण विकास तो होगा कि साथ मे गरीबी और बेरोजगारी भी दूर होगी। उद्योग मंत्री रविवार को सतना जिले के उचेहरा विकासखण्ड के ग्राम बाबूपुर में 150 करोड रूपये की लागत से विकसित होने वाले 180 हेक्टेयर क्षेत्र के नवीन औद्योगिक क्षेत्र के भूमिपूजन के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद गणेश सिंह ने की।
उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि नवीन औद्योगिक क्षेत्र बाबूपुर में अधोसंरचना विकास के कार्यो के लिये 150 करोड रूपये स्वीकृत किये गये है। जिसके माध्यम से मूलभूत सुविधायें उपलब्ध कराई जायेगी। बाबूपुर में लगभग 150 उद्योगो की स्थापना से आसपास के 10 हजार लोगो को रोजगार मिलेगा तथा उद्योगो द्वारा लगभग 15 हजार करोड रूपये की पूंजी का निवेश किया जायेगा। उद्योग मंत्री ने इस अवसर पर बताया कि रीवा में दुनिया का सबसे बडा सोलर प्लाण्ट बन रहा है। लेकिन वहां सिर्फ 5 हजार करोड का ही निवेश किया जा रहा है। देश के प्रमुख 5 इण्ड्रस्टियल कारीडोर मे से बनारस के कारीडोर को रीवा से जबलपुर तक बढाने के प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि सतना से बेला फोरलेन सड़क का कार्य फरवरी से प्रारंभ किया जायेगा। खजुराहो से रीवा रीवा से जबलपुर रीवा से सिंगरौली फोरलेन सड़क बन जाने से सतना जिले के मैहर चित्रकूट और मुकुन्दपुर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलो को मिलाकर टूरिस्ट सर्किट भी बनाया जायेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये सांसद गणेश सिंह ने कहा कि जिले में सीमेन्ट के बडे-बडे औद्योगिक प्रतिष्ठान है लेकिन लघु और छोटे उद्योगो की भी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। जिले को दो नवीन औद्योगिक क्षेत्र के रूप मे बहुत बडी सौगात मिल रही है। उन्होने कहा कि बाबूपुर और मैहर का औद्योगिक क्षेत्र जिले के विकास मे मील का पत्थर साबित होगा और अमरपाटन तथा सतना की बीच की दूरी भी कम होगी।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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