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एकात्म यात्रा रीवा के पचमठा से प्रारंभ होकर ओंकारेश्वर पहुंचेगी


आदिशंकराचार्य की प्रतिमा हेतु धातु संग्रहण एवं जनजागरण अभियान एकात्म यात्रा में से शामिल यात्रा दलों में से एक यात्रा रीवा के पचमठा से प्रारंभ होकर ओकारेश्वर पहुंचेगी। इस संबंध में तैयारी बैठक म.प्र. स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष शिव चौबे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मैथिल नायक, मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मयंक अग्रवाल, भाजपा अध्यक्ष विद्याप्रकाश श्रीवास्तव, यात्रा संयोजक वीरेन्द्र गुप्ता, रमेश गर्ग सहित संत, प्रबुद्धजन, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, मीडिया से जुड़े प्रतिनिधि, जन अभियान परिषद के सदस्य व स्थानीय जन उपस्थित थे।
बैठक में यात्रा के विषय में तथा जिले में की गयी तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी गयी। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में श्री शिव चौबे ने कहा कि यात्रा में सभी वर्गों की भागेदारी सुनिश्चित करायी जाय ताकि सामाजिक समरसता के भाव पैदा हो। जन संवाद में सभी की सहभागिता से सांस्कृति अम्युदय होगा तथा इससे मिलने वाली ऊर्जा देश में म.प्र.के एकात्म अध्यात्म का संदेश फैलायेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सांस्कृतिक अम्योदय के लिये 56 योजनाएँ संचालित की जा रही है जो प्रदेश के आध्यात्मिक वातावरण को बनाने में सहायक हो रही हैं।
एकात्म यात्रा के विषय में जानकारी देते हुए संभागीय समन्वयक जन अभियान परिषद अभिताभ श्रीवास्तव ने बताया कि पचमठा (रीवा) से 35 दिवसीय यात्रा 19 दिसम्बर को प्रारंभ होकर देवतालाब, नईगढ़ी, हनुमना होकर सिंगरौली, सीधी होते हुए होशंगाबाद पहुंचेगी जहां 22 जनवरी को प्रतिमा स्थापना हेतु भूमि पूजन/शिलान्यास तथा जन संवाद कार्यक्रम होंगे। रीवा जिले में यात्रा के दो दिवसीय आयोजन में जन संवाद के दो बड़े आयोजनों सहित धातु संग्रहण, चित्रकला व संभाषण प्रतियोगिता एवं शंकराचार्य विरचित स्त्रोतों का गायन होगा। रीवा से प्रारंभ होने वाली 1849 कि.मी. की यात्रा का नेतृत्व संत अखिलेश्वरानंद जी करेंगे। जिसमें 13 जिलों के लोग सम्मिलित रहेंगे।
जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक प्रवीण पाठक ने जिला स्तरीय आयोजन समिति की बैठक में मुख्य आयोजन स्थल पचमठा एवं यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले अन्य स्थानों में व्यवस्थाओं आदि की विस्तार से जानकारी देते हुए सौंपे गये दायित्वों के विषय में बताया।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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