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फूड फेस्टिवल आयोजन के साथ पर्यटन पर्व का हुआ समापन


पर्यटन को बढ़ावा देने  व आम लोगों में पर्यटन के क्षेत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पर्यटन पखवाड़ा अंतर्गत पर्यटन पर्व के समापन अवसर पर गत दिवस फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया।
स्थानीय पद्मधर पार्क में रीवा पर्यटन विकास परिषद, नगर पालिक निगम व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फूड फेस्टिवल में लजीज व्यंजनों के स्टाल लगाये गये। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, मिठाइयों, फास्टफूड के साथ ही बघेली के परंपरागत व्यंजनों का लोगों ने सपरिवार लुत्फ उठाया। इस दौरान संगीत संध्या भी आयोजित की गई।
इस अवसर पर व्यंजन प्रतियोगिता को दो समूह में विभक्त किया गया था। एक समूह रेस्टोरेंट/होटल का था जबकि दूसरा समूह व्यक्तिगत स्वनिर्मित खाद्य सामग्री के स्टाल का था। अधिक व्यंजनों की बिक्री करने वाले को प्रत्येक समूह हेतु ग्यारह-ग्यारह हजार रूपये की इनाम राशि निर्धारित की गयी थी। शाम पांच बजे से देर रात्रि तक शहर वासियों ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए व्यंजनों के स्वाद चखे।
समापन अवसर पर कलेक्टर श्रीमती प्रीति मैथिल नायक ने रेस्टोरेंट/होटल समूह स्टाल में सर्वाधिक बिक्री पर कामधेनु डेयरी एण्ड स्वीट्स ढेकहा के मालिक शांति नारायण पाण्डेय को ग्यारह हजार रूपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जबकि व्यक्तिगत स्टाल में लिट्टी चोखा उत्पाद की सर्वाधिक बिक्री हेतु दीपक मिश्रा को ग्यारह हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया गया। सांत्वना पुरस्कार के तौर पर दिव्यांग मोहम्मद इस्माइल के एयरगन बैलून स्टाल को पांच हजार एक सौ रूपये प्रदान किये गये।
उल्लेखनीय है कि फूड फेस्टिवल में रेस्टोरेंट/होटल समूह में पानी एवं काफी जोन, कामधेनु डेयरी एण्ड स्वीट्स, सेलिब्रेशन होटल एण्ड रिसोर्ट, होटल महाराजा, इंडियन काफी हाउस, द किचन रेस्टोरेन्ट, समदड़िया होटल, विन्ध्या रिट्रीट व शिवम मिष्ठान तथा व्यक्तिगत समूह में सौदामिनी इंस्टीट्यूट, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, एडवेंचर स्पोर्ट्स, लिट्टी चोखा, गोविदंगढ़, लक्ष्मणबाग, पुर्वा, मोहन, व्यंकट भवन, चचाई, मम साई सेवा समिति, हरिगौरी, देवकोठार व होमसाइंस ने अपने स्टाल लगाये।
समापन अवसर पर पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार, कमिश्नर नगर निगम सौरभ कुमार सुमन, जिला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सपरिवार उपस्थित थे। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, नगर निगम के अधिकारियों सहित जिला ई गवर्नेन्स मैनेजर आशीष दुबे उपस्थित थे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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