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पंडित शंभूनाथ शुक्ल राजनीति के शिखर पुरूष थे-उद्दोग मंत्री


विन्ध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री तथा स्वतंत्रता सेनानी पं. शंभूनाथ शुक्ल जी की स्मृति मे प्रतिवर्ष रीवा विश्वविद्यालय के सभागार मे होनेवाली संगोष्ठी मे प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल  मुख्य अतिथि के रूप मे शामिल हुए।खनिज साधन, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पंडित शंभूनाथ शुक्ल राजनीति के शिखर पुरूष थे। उनके स्मरण के बिना राजनीतिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उनका राजनीतिक जीवन प्रेरणादायी रहा। मंत्री श्री शुक्ल रीवा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में विन्ध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व विन्ध्य वसुंधरा के यशस्वी सपूत पंडित शंभूनाथ शुक्ल की स्मृति में आयोजित एक संगोष्ठी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पूर्व विधायक शिवमोहन सिंह, कुलपति अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा प्रो. के.एन.सिंह यादव, कुलपति पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल प्रो. मुकेश तिवारी, गरूण मिश्र, केशव पाण्डेय, ज्ञानवती अवस्थी, अमरकांत शुक्ल, जगजीवनलाल तिवारी सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व नगर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
उद्योग मंत्री ने कहा कि पंडित शंभूनाथ जी की स्मृति में यह कार्यक्रम उन्हें असीम आनन्द की अनुभूति देता है। इस तरह के आयोजन से न केवल हम स्वयं को गौरान्वित करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी को पंडित शंभूनाथ के व्यक्तिव, चरित्र, राजनीतिक जीवन के बारे में संदेश भी जाता है। उन्होंने कहा कि पंडित शंभूनाथ जी मात्र 17 वर्ष की आयु में देश को स्वतंत्र कराने के लिये जेल चले गये। देश के लिये इस तरह का कार्य करना अपने आप में अद्भुत था। उद्योग मंत्री ने पंडित शंभूनाथ शुक्ल की शिक्षा-दीक्षा और मंत्री व मुख्यमंत्री पद के लम्बे कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विंध्य की आधारशिला रखी। जिससे विन्ध्य सतत आगे बढ़ रहा है। रीवा व भोपाल सहित अन्य स्थानों में मानस भवन की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उनका सादा जीवन, विपरीत परिस्थितियों में कुशलता और बुद्धिमानी से राजनीतिक यात्रा पूरी करना प्रशंसनीय है। उनकी स्मृतियों को ताजा रखना है। जिससे विंध्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रहे और मूल्यों की राजनीति बनी रहे व वर्तमान चुनौतयों पर काम किया जा सके। उद्योग मंत्री ने शहडोल में बने विश्वविद्यालय का उल्लेख किया जिसका नामकरण पंडित शंभूनाथ शुक्ल जी पर किया गया है।
संगोष्ठी समारोह में मंचासीन अतिथियों ने भी पंडित शंभूनाथ शुक्ल जी द्वारा राजनीतिक, सामाजिक सहित अन्य क्षेत्र में किये गये कार्यों को याद किया और संगोष्ठी समारोह के विषय मूल्यों की राजनीति व वर्तमान चुनौतियां पर विस्तृत वक्तव्य दिया।  इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती व पंडित शंभूनाथ शुक्ल की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन और माल्यार्पण कर किया। कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना, मुकुल सोनी ने वन्दे मातरम और राजकुमार तिवारी ने विन्ध्य गीत की प्रशंसनीय प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन आयोजन समिति के अध्यक्ष अमरकांत शुक्ल ने व कार्यकम का सफल संचालन आरती तिवारी ने किया।
उद्योग मंत्री ने उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को किया सम्मानित – उद्योग मंत्री ने पंडित शंभूनाथ शुक्ल की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चन्द्रकान्त शुक्ल, चन्द्रिका प्रसाद चन्द्र, प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की गतिविधियों को संचालित करने वाली निर्मला बहन, हेमराज शर्मा, मंगल प्रसाद गुप्ता, सुशील तिवारी व रविदत्त सिंह को सम्मानित किया।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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