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एपीजे अब्दुल कलाम युवाओं के प्रेरणा स्रोत: राष्ट्रपति


देशभर के युवाओं और आम जनमानस के दिलों पर राज करने वाले देश के महान कर्मयोगी, भारतरत्न, मिसाइलमैन के नाम से लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर राष्ट्र आज उन्हें याद कर रहा है।

15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ कलाम का पूरा नाम आवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। ये डॉ कलाम की बहुमुखी प्रतिभा का ही कमाल है कि आज भारत के पास अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल जैसी विश्वस्तरीय उन्नत मिसाइलों का भंडार है। 1998 में उन्हीं की देखरेख में भारत ने पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया। इसके बाद भारत परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में शामिल हुआ था।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक दूरदर्शी राष्ट्रपति थे, जिन्होंने युवाओं को नए तरीके से सोचने की प्रेरणा दी। राष्ट्रपति ने रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन पंहुचे छात्रों के एक समूह को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि कलाम का जीवन बहुतों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्रपति ने कलाम संदेश वाहिनी के प्रयास का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह बस देश भर के लोगों को प्रेरित करेगी।
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उनके व्यक्तित्व ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को नमन किया। स्मृति ईरानी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। वह आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।  उद्दोग मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कलाम जी को नमन करते हुये   कहा  कि आप  का जीवन  भारत  के प्रगति का पथ प्रदर्शन करेगा ।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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