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पुरवा जलप्रपात स्थल पर बढ़ेगी पर्यटन सुविधायें


प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में जिला पर्यटन प्रोत्साहन परिषद की बैठक में निर्णय

प्रदेश के जनसम्पर्क, जल संसाधन, संसदीय कार्य और रीवा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने निर्देश दिये है कि जिले के सम्भावनाशील पर्यटन स्थलों को सूचीबद्ध कर लिया जाय। और पर्यटन विकास की कार्य योजना बनायी जाय। उन्होंने पुरवा जलप्रपात के समीप वन विभाग के रेस्ट हाउस में रीवा जिला पर्यटन प्रोत्साहन परिषद की बैठक लेकर पुरवा जलप्रपात स्थल को पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिये विचार विमर्श किया और दिशा निर्देश दिये।
बैठक में विधायक सेमरिया नीलम अभय मिश्रा, विद्याप्रकाश श्रीवास्तव, कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक, नगर निगम आयुक्त सौरभ कुमार सुमन, जिला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल, एएसपी आशुतोष गुप्ता, डीएफओ सहित जनप्रतिनिधि व संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
प्रभारी मंत्री डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिये पुरवा जलप्रपात के चारों ओर सघन वृक्षारोपण किया जाय। ऐसे वृक्ष लगाये जायं जो कम पानी, कम मिट्टी और चट्टानों पर उग आते है। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगा कर उनकी पर्याप्त देखभाल की जाय। उन्होंने कहा कि वरगद, पीपल जैसे वृक्ष रोपे जा सकते है। ये वृक्ष सहजता से उगते हैं। तथा लोगों द्वारा पूजे जाते है।
प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिये कि सौन्दर्यीकरण के साथ ही पर्यटन सुविधायें विकसित करने की भी जरूरत है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिये कार्य योजना बने। उन्होंने कहा कि रेस्ट हाउस में या सुविधाजनक स्थल पर केन्टीन स्थापित होनी चाहिये। ताकि पर्यटकों को जलपान की सुविधा मिले। बैठक में केन्टीन तथा रेन्ट हाउस का इन्तजाम सरकार और जनभागीदारी से स्वसहायता समूह के माध्यम से करने पर भी विचार किया गया। इस संबंध में वन मण्डलाधिकारी द्वारा कार्रवाई किया जाना निश्चित किया गया।
प्रभारी मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि विधायक नीलम मिश्रा का सुझाव उचित है यहां सुलभ शौचालय होना चाहिये। कलेक्टर रीवा द्वारा यह निर्माण कार्य कराने का आश्वासन दिया गया।
वन विभाग के रेस्ट हाउस के बकाया विद्युत बिल भुगतान के संबंध में चर्चा हुयी। बिल राशि कम करने के लिये निर्णय लिया गया कि उच्च स्तर पर इस संबंध में विचार कर उचित कार्रवाई की जायेगी। ताकि रेस्ट हाउस में विद्युत का स्थायी कनेक्शन सदैव बना रहे। प्रभारी मंत्री ने इको टूरिज्म बोर्ड, वन विभाग आदि विभागों और संस्थाओं से चर्चा कर पुरवा जलप्रपात को बेहतर पर्यटन स्थल बनाने के लिये सभी प्रयास समुचित ढंग से करने के निर्देश दिये।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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