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प्रदेश सरकार ने बेटियों को अवसर-सुरक्षा-सम्मान दिलाया


रीवा में लाड़ली शिक्षा पर्व समारोह में प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा

प्रदेश के जनसम्पर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर, सुरक्षा और सम्मान दिया है। प्रदेश में अब बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी कहा जाने लगा है। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक बेटियां लाड़ली लक्ष्मी बन चुकी हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां बेटियों-बहनों को सशक्त बनाने के लिये उनके जन्म से लेकर पूरे जीवन काल के लिये योजनायें बनायी गयी तथा उनका सफल क्रियान्वयन किया गया।
जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्रा रीवा जिले में मानस भवन में आयोजित जिला स्तरीय लाड़ली शिक्षा पर्व समारोह को मुख्य अतिथि की आसन्दी से सम्बोधित करे रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना के अन्तर्गत कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाली छःह बालिकाओं को टोकन के रूप में ई छात्रवृत्ति वितरण प्रमाण पत्र प्रदान किये। छात्रवृत्ति की राशि प्रत्येक बालिका के बैंक खाते में सीधे जमा करायी गयी। पूरे जिले में ऐसी 1052 बालिकाओं को प्रमाण पत्र दिये गये।
रीवा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने बेटी-बहनों को सही अर्थों में सम्मान दिलाया है। उन्होंने नवाचार कर पूरे देश में पहली बार मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की। जिसे अन्य प्रान्तो में सराहा और अपनाया गया। मुख्यमंत्री जब संसद सदस्य थे तो वे गरीब कन्याओं का विवाह स्वयं कराते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना शुरू की। पहले गरीब परिवार में बेटी का जन्म होने पर प्रसन्नता नहीं व्यक्त की जाती थी। अब म.प्र. सरकार की नीतियों से सामाजिक आर्थिक परिवर्तन आया है। और बेटी को लक्ष्मी माना जाने लगा है। म.प्र. में अब बेटी का जन्म वरदान माना जाने लगा है। प्रभारी मंत्री ने बेटी के जन्म से लेकर पूरे जीवन काल के लिये मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा आज ग्राम पंचायत, नगरीय निकायों में महिलाओं के लिये 50 प्रतिशत आरक्षण है। शासकीय सेवा में आरक्षण है।
जनसम्पर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्रा ने प्रदेश सरकार की भावान्तर भुगतान योजना का लाभ अधिक से अधिक कृषकों को दिलाने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि कृषकों के कल्याण के लिये यह अनूठी योजना है। कृषक योजना के अन्तर्गत पंजीयन करायें।
विधायक नीलम मिश्रा ने कहा कि बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकता है। उन्होंने बेटियों के लिये राज्य शासन की योजनाओं का उल्लेख करते हुये लाभ प्राप्त करने की अपील की।
प्रभारी मंत्री डॉ. मिश्रा ने रीवा में समारोह स्थल पर भावान्तर भुगतान योजना और लाड़ली शिक्षा पर्व के अवसर पर भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गये उद्बोधन को देखा और सुना। मुख्यमंत्री जी का उद्बोधन उपस्थित लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं और उनके अभिभावकों ने भी सुना। प्रभारी मंत्री ने इस दौरान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देने वाले यात्रा वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि जिले में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया जहां मुख्यमंत्री जी के दोनों अवसरों के उद्बोधन को देखा एवं सुना गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि रीवा जिले में चार स्थानों रीवा, मऊगंज, जवा और त्यौथर में लाड़ली शिक्षा पर्व के अवसर पर आयोजन किये गये जिसमें योजना तहत कक्षा छःह में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं को दो हजार रूपये ई छात्रवृत्ति प्रदान की गयी। इन कार्यक्रमों में 1052 लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं को ई-भुगतान कर प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। हीमोग्लोबिन जांच तथा फेरस एस्कारबेट, विटामिन-सी और बायको वन की गोलियों का वितरण किया गया। बालिकाओं स्नेहा शुक्ला, पूर्वी पटेल, कीर्ति शुक्ल, कंचन कोल, रिया मिश्रा, पूर्ति मिश्रा और खुशी मल्लाह ने प्रभारी मंत्री से ई-भुगतान प्रमाण पत्र प्राप्त किये। श्री सिंह ने बताया कि जिले में योजना के प्रारंभ से अब तक करीब 70 हजार से अधिक बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिया जा चुका है।
इस अवसर पर विद्याप्रकाश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष जिला पंचायत विभा पटेल, जनपद पंचायत रीवा के अध्यक्ष के.पी. त्रिपाठी, कलेक्टर रीवा प्रीति मैथिल नायक, पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार, एडीशनल एस.पी. आशुतोष गुप्ता, मनीषा पाठक, उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल जी के विधायक प्रतिनिधि विवेक दुबे, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास, तथा संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे। मंच संचालन सहायक संचालक पिछड़ावर्ग सी.एल. सोनी ने किया।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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