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रीवा सौर परियोजना से उत्पादित विद्युत के भुगतान की गारंटी देगी राज्य सरकार


रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना से राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा सौर ऊर्जा की खरीदी के लिए राज्य शासन की गारंटी हस्ताक्षरित की जा चुकी है। यह गारंटी भुगतान की सुनिश्चितता के अंतर्गत एक अनूठी पहल है। रीवा प्रोजेक्ट द्वारा न्यूनतम दर हासिल किये जाने में भुगतान सुनिश्चितता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गारंटी म.प्र. पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी द्वारा भुगतान करने में असफल होने की दशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विकासकों को भुगतान सुनिश्चित करेगी।

मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की महत्वाकांक्षी इस परियोजना का विकास तेजी पर है। परियोजना का विकास, भारत सरकार के उपक्रम सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन एवं ऊर्जा विकास निगम के संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

परियोजना के लिए जारी निविदा में प्रमुखता से 20 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी द्वारा सहभागिता की गयी थी। इनमें 6 विदेशी एवं 14 स्वदेशी थी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए गत 10 फरवरी को 3 सफल विकासकों का चयन किया गया, जिनमें 2 राष्ट्रीय महिंद्रा रिन्युबल एवं एक्मे एनर्जी और एक अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी सोल एनर्जी शामिल है। परियोजना विकास के अग्रिम चरण में गत 17 अप्रैल को विकासकों, दिल्ली मेट्रो एवं म.प्र. पॉवर मैनेजमेंट व रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड के मध्य विद्युत क्रय और अन्य आवश्यक अनुबंध हस्ताक्षरित किए गए।

परियोजना के विकास में इंटरनेशल फायनेंस कार्पोरेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसकी सलाहकार सेवाओं के फलस्वरूप परियोजना के लिए प्राप्त टैरिफ दर ने पूर्व में देश में प्राप्त न्यूनतम टैरिफ 4.34 रुपये को काफी पीछे छोड़कर 2.97 रुपये की दर प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

टैरिफ कम होने के प्रमुख कारकों में से एक भुगतान सुनिश्चितता के लिए दी जाने वाली राज्य शासन गारंटी है, जिसे परियोजना विकास के क्रम में विकासकों के साथ साझा किया गया था। परियोजना से उत्पादित MPPMCL द्वारा खरीदी जाने वाली विद्युत के संबंध में भुगतान की सुनिश्चितता के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट एवं भुगतान सुनिश्चितता कोष के बाद तीसरी गारंटी के रूप में, राज्य शासन की गारंटी की व्यवस्था की गई है।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा परियोजना विकास के इस मॉडल के अनुसरण के लिए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखा गया है, जिसमें त्रि-स्तरीय भुगतान व्यवस्था और राज्य शासन गारंटी का विशेष उल्लेख है।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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