समाचार

औद्यौगिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाएँ


ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कमेटी की बैठक में उद्योग मंत्री श्री शुक्ल

उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कमेटी की बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कि मंशा के अनुरूप प्रदेश में औद्यौगिक क्रांति लाना है। इसके लिए जरूरी है कि भूमि आबंटन प्रक्रिया सहित अन्य प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए।

बैठक मे ईओडीबी अल्पावधि लक्ष्य, मध्यम तथा दीर्घकालिक लक्ष्य पर विचार विमर्श हुआ। अल्पावधि लक्ष्य मे बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान 2017 मे शीर्ष 3 मे स्थान प्राप्त करना, मध्यम अवधि लक्ष्य मे इन्वेस्ट पोर्टल के माध्यम से निवेशकों को तेज एवं सुविधापूर्वक सेवाओं को ऑनलाइन प्रदान किया जाना, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिकतम सेवाओं को अधिसूचित कराना, स्थापित परियोजनाओं का लाइफ साइकिल मैनेजमेंट, ऑनलाइन शुल्क का भुगतान तथा 5 सेक्टर्स (पर्यटन, स्वास्थ्य, आईटी, फूड प्रोसेसिंग एवं मेन्युफेक्चरिंग) की परियोजनाओं को कॉमन एप्लिकेशन फार्म से अनुमतियां एवं वित्तीय सुविधाए जारी किया जाना तथा दीर्घकालिक लक्ष्य मे किसी परियोजना की स्थापना के लिए निवेशक को वांछित अनुमतियों की संख्या मे कमी लाना एवं समय-सीमा मे कमी करने के साथ स्वाप्रमाणिकरण एवं डीम्ड अनुमोदन की व्यवस्था आदि लागू करने पर सहमति हुई।

बैठक में बताया गया की भारत सरकार का लक्ष्य देश को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अन्तर्गत प्रथम 50 देशों की श्रेणी में लाना है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 से बिजनेस रिफार्म एक्शन प्लान की अवधारणा के आधार पर विभिन्न राज्यों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किये गये कार्य एवं प्रयासों का मूल्यांकन कर उनकी रैंकिग प्रारंभ की गयी है। भारत सरकार द्वारा अब तक वर्ष 2015 एवं 2016 में राज्यों की रैंकिग की गयी है, जिसमे मध्यप्रदेश को दोनों वर्षो में 05वां स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि वर्ष 2017 के लिए रैंकिग प्रक्रियाधीन है।

बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सांरग, अपर मुख्य सचिव श्री ऐ.पी. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के. मिश्रा, प्रमुख सचिव सुक्ष्म एवं लघु उद्योग श्री कांता राव प्रबंध संचालक ट्रायफेक श्री डी.पी. अहुजा, उप सचिव मुख्यमंत्री श्री नंदकुमारम सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...