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स्वर्णकला की देन महाराजा अजमीढ़ देव की है -उद्दोग मंत्री


स्वर्णकार समाज द्वारा आयोजित महाराजा अजमीढ़ देव जयंती समारोह में मुख्यअतिथि के तौर पर सम्बोधित करते हुए उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सोनी समाज की संगठन की शक्ति से न सिर्फ समाज वरन रीवा शहर व जिला भी आगे बढ़ेगा । उन्होंने सोनी समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उत्साह की प्रशंसा की।

उद्योग मंत्री ने कहा कि स्वर्णकला की देन महाराजा अजमीढ़ देव की है उन्होंने महान कार्य कर अपना स्थान बनाया है। सोनी समाज उनके बताये रास्ते पर चलकर संगठित होते हुए आपसी भाई चारे के साथ सामूहिक विवाह व गरीब बच्चों की मदद आदि के कार्य कर रहा है जो वंदनीय व प्रशंसनीय है। उन्होंने समाज द्वारा प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कृत करने पर बधाई दी व कहा कि यह बच्चे रीवा का प्रदेश व देश में नाम रोशन करेंगे और रीवा के विकास में भागीदार भी बनेंगे ।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मेधावी बच्चों के शाल श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह देकर पुरस्कृत किया। कार्यक्रम को युवा स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष धनंजय सोनी ने भी सम्बोधित किया। मंत्री जी का इस अवसर पर गजमाला, शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सोनी समाज के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इस दौरान समाज के उच्च पदों तक पहुंचे जनप्रतिनिधियों का सम्मान भी किया गया । इस अवसर पर पार्षद चिंटू सोनी, संजना सोनी, पुष्पा सोनी सहित स्वर्णकार समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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