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प्रयास मे मोदी सरकार, मुफ्त चलेंगे दोपहिया बस ट्रक कार


अगर सबकुछ समयानुसार रहा तो बढ़ती हुयी पेट्रोल -डीजल की कीमत देश के लिए वरदान और देश के दुश्मनों के लिए अभिशाप साबित होगी ।खास बात यह भी है कि देश मे आने वाले इस क्रांतिकारी बदलाव की मुख्य धुरी बनेगा अपना विन्ध्य। मध्यप्रदेश और इसका यह विंध्य भाग इस महत्वपूर्ण कार्य को मुकाम तक पहुंचाने मे अपनी सबसे सफल भूमिका का निर्वहन करेंगे । पेट्रोलियम उत्पादों की खरीदी मे जहां देश की बहुमूल्य पूँजी विदेशों मे जाती है वहीं यह पूँजी प्राप्त कर रहे देशों से कम या ज्यादा मात्रा मे आतंकवाद को प्राश्रय और बढ़ावा भी दिया जा रहा है । भारत को कमजोर बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहे इस तेल हथियार की धार को कम करके मोदी सरकार इनके कुत्सित मनसूबो पर पानी फेरने का कार्य करेगी ।देश के अंदर भी देश विरोधी गाना गाने वाले इन तेल उत्पादक देशों की समृद्धि का जो बखान करते नहीं थकते उनका भी गाना गाना बंद हो जायेगा और देश कैसे अपने संसाधनों से समृद्ध हो सकता है यह सपना मोदी सरकार साकार करके दिखाएगी ।और यह सब होगा भारत की तकदीर और तश्वीर बदलने वाली सरकार की एक योजना से जिसे नाम दिया गया है “फेम इंडिया “(फ़ास्टर एडाप्शन एंड मैनुफ़ेक्चरिंग आफ हाइब्रिड एंड इलैक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया )।

इलेक्ट्रिक स्कूटर ,कार और बस,ट्रक आदि  पर सरकार की योजना अनुसार सीधे उपभोक्ता को सब्सिडी दी जा रही है । पर्यावरण प्रदूषण और पेट्रोलियम उत्पाद मे खर्च हो रहे पैसे से चिंतित सरकार ने बिजली से चलने वाले वाहनों को पूरी तरह से बढ़ावा देने का निर्णय लिया है और उसे लगातार बढ़ा रही है । मोदी सरकार इस नीति को 9 अप्रैल 2015 को लागू कर चुकी है । इस फेम इंडिया योजना के तहत दोपहिया वाहनों पर 22000 रूपये ,थ्री व्हीलर पर 60000 रूपये ,कार पर एक लाख अड़तीस हजार ,बस पर 6 लाख 60 हजार रुपए तक की सबसिडी देने का निर्णय सरकार ने लिया है । इस सब्सिडी के लिए फेम इंडिया के तहत 14 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था । इस राशि का उपयोग देश मे इलेक्ट्रिक व्हीकल के परिचालन मे किया जा रहा है । वर्ष 2020 तक 60 से 70 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को बेचने का लक्ष्य रखा गया है ।

सरकार इन वाहनों को देश मे ही बनाने के लिए प्रोत्साहन देगी लेकिन नई तकनीक की जरूरत के कारण विदेशी कंपनियों के लिए भी क्षेत्र को खुला रखा गया है । सरकार का मानना है कि फेम इंडिया के पूरी तरह से सफल होने पर वातावरण से 2 करोड़ 40 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड की कमी की जा सकती है और 60 हजार करोड़ रूपये के 9 अरब 50 करोड़ लीटर ईधन की भी बचत होगी । इससे लगभग 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा । वाहनों पर दी जाने वाली सबसिडी भारत मे निर्मित वाहनों पर ही दी जाएगी ।फेम इंडिया मे मांग आपूर्ति की व्यवस्था करना ,औदोगिक विकास ,इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंगढांचा तैयार करना और प्रायोगिक योजनायें शुरू करना है ।

इस योजना मे चार्जिंग स्टेशन सरकार बनाएगी और इन पर चार्जिंग की मुफ्त व्यवस्था होगी ।

दिल्ली एन सी आर , महानगर , 10 लाख आबादी वाले शहर पहले शामिल हैं धीरे धीरे यह योजना पूरे देश मे लागू होगी । वर्ष 2020 तक 70 लाख वाहनों पर 700 मेगावाट बिजली खर्च होगी इस लिहाज से देखा जाए तो रीवा मे बन रहा सौर ऊर्जा संयंत्र 750 मेगावाट का है साथ ही आगे और अधिक सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली उत्पादन का असर यह होगा की देश मे वाहन मुफ्त जैसी स्थिति मे हमेशा चल सकेंगे ।

भारत मे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है लेकिन अभी जागरूकता का बड़ा   अभाव है भारत सरकार ने 2030 तक भारत के सभी नये वाहनों को इलेक्ट्रिक बेस्ड बनाने का लक्ष्य रखा है । इस पोलसी को 2017 के अंत तक जारी कर दिया जाएगा । महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस दिशा मे काफी काम कर लिया है । टाटा मोटर्स के साथ अन्य कंपनियाँ भी इस दिशा मे काफी तेजी से कम कर रही हैं । आने वाला समय इलेक्ट्रिक वाहनों का होगा और उनको इलेक्ट्रिक सप्लाई करने मे मध्यप्रदेश और उसमे भी विंध्य सबसे आंगे होगा ।

अजय नारायण त्रिपाठी

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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