समाचार

एक दिन के मीसाबंदी को भी मिलेगी सम्मान निधि


मंत्रि-परिषद् की बैठक आज 12 सितम्बर 2017, मंगलवार मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य में इस मानसून में हुई कम वर्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। इस संबंध में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एक अलग बैठक में भी संबंधित विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से आज चर्चा की। आज की मंत्रिपरिषद् की बैठक में यह तय हुआ कि मंत्रि-परिषद् के सदस्य आगामी सोमवार और मंगलवार को पूर्व में की गई व्यवस्था के अनुसार राजधानी में न रहकर अपने प्रभार के जिलों में भ्रमण करेंगे। मंत्रिगण कम वर्षा के हालात देखेंगे, अधिकारियों से बैठकें कर आवश्यक उपायों पर अमल सुनिश्चित करेंगे।
मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज जो निर्णय लिए गए, उनका विवरण  इस प्रकार है :-
• मंत्रि-परिषद् ने आज ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री स्थायी कृषि पंप कनेक्शन योजना में नए प्रावधान शामिल किए हैं। किसानों के हित में निर्णय लिया गया कि स्थायी कृषि पंप कनेक्शन के लिए किसान को पूरे वर्ष 1400 रूपये प्रति हार्सपावर की दर से बिजली प्राप्त होती है। इसके साथ ही प्रति स्थायी कनेक्शन लगभग 40-45 हजार की रूपये की राशि लगती है। अब किसानों को स्थायी कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए योजना में दो प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अनुसार वर्तमान में लागू योजना में समीपवर्ती खेतों के लिए संयुक्त आवेदन करने पर भी प्रत्येक किसान को अलग-अलग अंश राशि देनी होती है। दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले अनुसूचित जाति, जनजाति किसान को 5500 रूपये प्रति हार्सपॉवर की दर से और अन्य श्रेणी के किसान को 7500 रूपये प्रति हार्सपॉवर की दर से पैसा देना होता है। दो हेक्टेयर तथा उससे अधिक भूमि वाले किसानों को 12 हजार रूपये प्रति हार्सपावर की दर से अंश राशि देनी होती। नए प्रावधान लागू होने से एक साथ आवेदन करने पर एक ही अधोसंरचना से कनेक्शन देने की स्थिति में 25 केव्हीए क्षमता के ट्रांसफार्मर के लिए संयुक्त आवेदित 20 हार्सपॉवर तक के भार के लिए, अधिकतम तीन किसानों को अलग-अलग पैसा नहीं देना होगा। इससे किसानों को कम अंश राशि देने पर स्थायी कनेक्शन मिल जाएगा। योजना के विस्तृत प्रावधानों की जानकारी जिलों में किसानों तक पहुँचाने के लिए ऊर्जा विभाग निरंतर प्रयास करेंगा।
• मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी कड़ी में आज मंत्रि-परिषद् ने आज शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए राशि मंजूर की है। एजेण्डा के अलग-अलग छह बिन्दुओं के अंतर्गत तीस वर्ष सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को तृतीय क्रमोन्नत वेतनमान, नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक सामग्री, शिक्षक आवास गृह, नि:शुल्क गणवेश प्रदाय योजना, शालाओं में बाउंड्री वाल और साक्षर भारत योजना से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की है।
• आज मंत्रि परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक शिक्षकों को तीस वर्ष सेवा पूरी होने पर तीसरे क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिए जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के लगभग 30 हजार शिक्षकों को प्राप्त होगा। निर्णय के अनुसार तीस वर्ष की निरंतर सेवा उपरांत सहायक शिक्षको को तृतीय क्रमोन्नत वेतनमान ग्रेड-पे 6600 देय होगा। यह व्यवस्था दिनांक 1 जुलाई 2014 से प्रभावशील रहेंगी।
• स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत ड्रिकिंग वाटर (पेयजल सुविधा) (2067) योजना अंतर्गत शासकीय प्राथमिक/माध्यमिक शालाओं में स्थायी पेयजल स्त्रोत उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत 06 से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। इसके तहत प्रत्येक बसाहट में एक किलोमीटर परिधि में शासकीय प्राथमिक शाला एवं तीन किलोमीटर परिधि में शासकीय माध्यमिक शाला की सुविधा उपलब्ध कराई जाना अनिवार्य है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 84 हजार 057 शासकीय प्राथमिक शालाएं और 30 हजार 266 शासकीय माध्यमिक शालाएं बसाहट की परिधि में अधिसूचित की जा चुकी हैं। योजना में वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक व्यय सीमा राशि रुपए 4465 लाख निर्धारित किए जाने का निर्णय लिया गया।
• स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही मंत्रि-परिषद् ने आज नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक सामग्री योजना (क्र.2267) के संचालन की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। सर्व शिक्षा अभियान योजनांतर्गत शासकीय शालाओं में अध्ययनरत् कक्षा-1 से 8 तक के समस्त बालिकाओं एवं अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के बालकों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें वर्ष 2003-04 से प्रदाय की जा रही हैं। शासकीय शालाओं में अध्ययनरत कक्षा-1 से 8 के समस्त गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग परिवार के बालकों को एवं 2004-05 से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग परिवार के बालकों को राज्य योजना मद से नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें दी जा रही हैं। नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें योजना में वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 के लिए व्यय राशि की सीमा रुपए 2496 लाख की निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
• बालिका छात्रावासों में पर्याप्त सुरक्षा के लिए प्रत्येक जिले के छात्रावास में शिक्षक आवास गृह बनाने की आवश्यकता है। कुल 546 छात्रावासों में इनकी जरूरत हैं। इन कार्यों के लिए 2496 लाख रुपए का व्यय अनुमानित है। वर्तमान वित्त वर्ष के साथ ही आगामी दो वित्त वर्ष के लिए यह राशि व्यय की जाएगी। मंत्रि परिषद द्वारा इसकी मंजूरी प्रदान की। अब पालक शिक्षक संघ स्वसहायता समूहों से यूनिफार्म तैयार करवाकर प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों को साइकल प्रदाय किए जाने की योजना को भी लोकप्रियता मिली है। इस श्रृंखला में विद्यार्थियों को यूनिफार्म दिए जाने से शिक्षा के प्रति उनकी रूचि में वृद्धि हो रही है।
• नि:शुल्क गणवेश प्रदाय योजना के अंतर्गत तीन वित्त वर्ष के लिए 180 करोड़ रुपए की राशि के संभावित व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश में कक्षा-1 से 8 तक पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को फ्री यूनिफार्म प्रदान की जाती है। आज मंत्रि परिषद ने इस संबंध में मंजूरी प्रदान की।
• मंत्रि-परिषद् ने आज जल संसाधन विभाग के अंतर्गत सिंगरौली जिले में गोंड वृहद सिंचाई परियोजना के लिए 1097.67 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। परियोजना से रबी सिंचाई क्षमता 28 हजार हेक्टेयर और खरीफ सिंचाई क्षमता 6500 हेक्टेयर क्षेत्र में संभव होगी। सिंगरौली जिले के विकास खण्ड बैढ़न तहसील सरई के ग्राम जालपानी के समीप गोपद नदी पर बांध निर्माण प्रस्तावित है। गोंड परियोजना के बांध के प्रस्तावित स्थल तक कुल जल ग्रहण क्षेत्र 2095 वर्ग किलोमीटर है। जल संसाधन विभाग के ही अंतर्गत जललपुर, कटनी, सतना और रीवा में बरगी व्यपवर्तन परियोजना के कमाण्ड क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन योजना के लिए 935.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई। यह परियोजना मार्च 2019 तक पूरी करने का लक्ष्य है। इस परियोजना की वार्षिक सिंचाई क्षमता तीन लाख, 76 हजार 515 हेक्टेयर है। इसमें रबी की सिंचाई क्षमता एक लाख 75 हजार 597 हेक्टेयर और खरीफ की सिंचाई क्षमता दो लाख 918 हेक्टेयर है। इस परियोजना से जबलपुर जिले के 438, कटनी जिले के 127, सतना जिले के 855 और रीवा जिले के 30 ग्राम इस प्रकार कुल 1450 ग्राम लाभांवित होंगे।
• मंत्रि-परिषद् ने आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मीसा/डी.आई.आर. राजनैतिक या सामाजिक कारणों के निरूद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम 2008 में संशोधन करने का निर्णय लिया। इसके अनुसार अब जो व्यक्ति मीसा/डी.आई.आर. के अधीन राजनैतिक या सामाजिक कारणों से एक महिने से कम अवधि के लिए निरूद्ध रहे हैं, उन्हें आठ हजार रुपए प्रतिमाह और जो व्यक्ति एक माह या एक माह से अधिक की कालावधि के लिए निरूद्ध रहे है, उन्हें 25 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मान निधि की पात्रता होगी। इसके पहले ऐसे व्यक्ति जो एक माह से कम अवधि के लिए निरूद्ध रहे उन्हें सम्मान निधि नहीं मिलती थी। आज के निर्णय के अनुसार ऐसे पात्र व्यक्ति जो मीसा/डी.आई.आर. के अधीन राजनैतिक या सामाजिक कारणों से एक माह से कम कालावधि के लिए निरूद्ध रहे हो, उन्हें आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। नए नियमों के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की दिनांक से 30 नबंवर 2017 तक यह आवेदन पत्र दिए जा सकते है।
• मंत्रि-परिषद् ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अंतर्गत आज शहरी क्षेत्र में अस्पताल और औषधालयों के भवन निर्माण संबंधी योजना वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 तक निरंतर रखने की सैद्धांतिक सहमति देने का निर्णय लिया। इस योजना में रुपए 583.55 करोड़ की राशि का अनुमोदन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत ही मंत्रि-परिषद् ने आज ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य/उपस्वास्थ्य/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण की निरंतरता तथा संचालन की स्वीकृति प्रदान की। विभागीय संक्षेपिका दिनांक 24.08.2017 में वर्णित अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य/उपस्वास्थ्य/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्दों के भवन निर्माण संबंधी योजना को वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 तक निरंतर रखने की सहमति प्रदान की। योजना में रुपए 410.84 करोड़ का अनुमोदन भी किया गया।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...