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चित्रकूट के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का होगा विकास – शिवराज सिंह चौहान


मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थलो का भ्रमण कर किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चित्रकूट के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के सभी स्थलो का प्राकृतिक सौन्दर्य और मूलस्वरूप यथावत रखते हुये सौन्दर्यीकरण और विकास किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सतना जिले के चित्रकूट प्रवास के दौरान हनुमान धारा, वनदेवी, मंदाकिनी के किनारे स्थित जानकीकुण्ड, स्फटिकशिला, रामघाट और राघव प्रयाग घाट का भ्रमण किया और स्थानीय साधु संतो तथा नागरिको से विकास की रूपरेखा के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन योजना के तहत रामायण सर्किट में चित्रकूट और आसपास के धार्मिक महत्व के स्थलो का विकास और सौन्दर्यीकरण की योजना को अंतिम रूप स्थानीय जनभावनाओ के अनुरूप दिया जायेगा। इस मौके पर लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, उद्योग वाणिज्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, जिला भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र त्रिपाठी, दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अभय महाजन, कमिश्नर रीवा एस.के.पाल, आई.जी. अंशुमान यादव, कलेक्टर नरेश पाल, पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर, सी.ई.ओ. जिला पंचायत अनूप कुमार सिंह सहित पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सर्वप्रथम हनुमान धारा पहुंचकर पर्यटन विकास निगम द्वारा प्रस्तावित सौन्दर्यीकरण और विकास सुविधाओ के कार्यो के संबंध में जानकारी ली। इस मौके पर उन्होंने स्थानीय मांग के अनुरूप हनुमान धारा की सीढियो की दो तरफा रेलिंग शेड और भव्य स्वागत द्वार गेट बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन स्थानो पर सीढिया सकरी है वहां पर चौढीकरण किया जायेगा। हनुमान धारा मे जनसुविधाओ के लिये टायलेट और स्वच्छता के लिये डस्टबिन भी रखाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय दुकानदारो से चर्चा और सहमति प्राप्त कर दुकानो को सुव्यवस्थित भी किया जायेगा। हनुमान धारा के प्राईमरी स्कूल का भवन भी उन्होंने बनाने के निर्देश दिये।

वनदेवी मंदिर परिसर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह स्थान सुन्दर और रमणिक बने इसके लिये बाउन्डरीवाल बनाकर प्राचीन कुंए का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा तथा सामूदायिक भवन का निर्माण भी किया जायेगा। मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित सीताकुण्ड (जानकीकुण्ड) का भी मुख्यमंत्री ने दर्शन किये। उन्होंने धार्मिक महत्व के चिन्हो को अक्षुण्य रखते हुये घाट को नया स्वरूप देने, मंदाकिनी के किनारे के वृक्षो को सुरक्षित करने तथा जनसुविधा और पेयजल व्यवस्था के भी कार्य किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल मंदाकिनी नदी का ह्रद्रय स्थल है। मॅा मंदाकिनी मे गंदा पानी नही मिले इसके लिये सीवर लाईन योजना को शीघ्र पूर्ण कराया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्फटिकशिला पर साधु संतो एवं स्थानीय गणमान्य नागरिको के साथ बैठकर सुव्यवस्थित सौन्दर्यीकरण के संबंध में चर्चा की।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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