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स्कूल के बच्चों को व्हाइट टाइगर सफारी घुमाने ले गये उद्योग मंत्री


उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल आज रीवा शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को महाराजा मार्तण्ड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू घुमाने ले गये। उनके साथ बच्चों ने बाघ व अन्य जानवर देखे और खुब प्रफुल्लित हुए।
उद्योग मंत्री ने बच्चों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि रीवा की विश्व में पहचान सफेद बाघ से होती है और अब अपनी विरासत व पहचान वापस आ गयी है। उन्होंने कहा कि विन्ध्य व रीवा के इतिहास को आज की पीढ़ी जाने इसी उद्देश्य से आज यह बच्चे यहाँ आये हैं। इन्हीं सब उद्देश्यों के लिये ही वो व्हाइट टाइगर सफारी की स्थापना भी की गयी है। बच्चों ने सफारी में सफेद बाघ, भालू, पीला बाघ सहित अन्य जानवरों को देखा व रोमांचित हुए।
उल्लेखनीय है कि मिल बांचे कार्यक्रम के दौरान गत दिनों उद्योग मंत्री ने बच्चों को व्हाइट टाइगर सफारी दिखाने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में दो बसों में बच्चे व्हाइट टाइगर सफारी गये और मंत्री जी के साथ जानवरों को देखा।
सोवेनियर शाप का हुआ लोकार्पण:- उद्योग मंत्री ने व्हाइट टाइगर सफारी में सोवेनियर शाप का लोकार्पण किया। बंशी एम्पोरियम मुकुंदपुर अंतरगत म.प्र. राज्य बांस मिशन द्वारा पंजीकृत स्वसहायता समूह बांस शिल्प सोनौरा द्वारा उत्पादित बांस के उत्पाद इस शाप ने विक्रय हेतु उपलब्ध रहेंगे। उद्योग मंत्री ने कहा कि सफारी में आने वाले पर्यटक बांस से बने उत्पाद खरीद पायेंगे और स्वसहायता समूहों को आय का साधन मुहैया होगा।
वन विश्राम गृह लोकार्पण:- उद्योग मंत्री ने वन विभाग द्वारा निर्मित मुकुंदपुर वन विश्राम गृह का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक एन.काली दुरई, वन मंडलाधिकारी सतना, डायरेक्टर व्हाइट टाइगर सफारी संजय रायखेडे सहित वन विभाग के अधिकारी व विद्यालय के अध्यापक उपस्थित थे।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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