समाचार

परिवहन सेवा में विद्युत चलित वाहन उपयोग की संभावनाएँ तलाशें


मुख्यमंत्री श्री चौहान तथा उद्दोग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल  निवेशकों से मिले

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नगर परिवहन सेवा में विद्युत चलित वाहनों के उपयोग की संभावनायें तलाशने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में मध्यप्रदेश को देश में अव्वल आना चाहिए। श्री चौहान आज मंत्रालय में निवेशकों से भेंट उपरांत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला भी मौजूद थे।

निवेशकों ने की भेंट

मुख्यमंत्री श्री चौहान से अवान्ता ग्रुप के चेयरमेन श्री गौतम थापर, छिंदवाड़ा प्लस डेव्हलपर्स लिमिटेड के प्रर्वतक श्री कमल अग्रवाल, सागर मेन्यूफ्रेक्चरिंग के श्री सुधीर अग्रवाल और श्री सिद्धार्थ अग्रवाल ने भेंट की। मुख्यमंत्री को निवेशकों ने परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि निवेशकों को जो सुविधाएँ, सहूलियतें देने की बात सरकार ने कही है, उन पर अमल पूरी निष्ठा से होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवश्यक होने पर संशोधन के प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत करें।

ईज ऑफ डूइंग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रस्तुतिकरण का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। जिन राज्यों ने गत वर्षों में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी जानकारियों के साथ तुलनात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

इस अवसर पर बताया गया कि इज ऑफ डूइंग बिजनेस के कार्यों में जून माह तक 82 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति हो गई है। शेष 17 प्रतिशत लक्ष्य शीघ्र पूरे किये जाएंगें।

बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव राजस्व श्री अरूण पाण्डेय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा और सचिव श्री हरिरंजन राव भी शामिल हुए।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...