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सरकार का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना होता है-उद्दोग मंत्री


गुणवत्ता शिक्षा संबंधी संकल्प सभा का किया गया आयोजन

संभागीय म.प्र. शासकीय अध्यापक संगठन के तत्वाधान में गुणवत्ता शिक्षा संबंधी संकल्प सभा का आयोजन किया गया। टीआरएस कालेज के आडिटोरियम में आयोजित इस संकल्प सभा में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अध्यापक संगठन द्वारा गुणवत्ता शिक्षा के विषय में इस सभा का आयोजन प्रंशसनीय है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना होता है वास्तव में शिक्षा में गुणवत्ता होना बहुत आवश्यक है और यह अध्यापकों, शिक्षकों के द्वारा ही संभव है। किसी भी छात्र के व्यक्तित्व विकास की जिम्मेदारी इनके ही कंधे पर ही होती है। मंत्री श्री शुक्ल ने आव्हान किया कि शिक्षा जगत से जुड़े लोग ऐसे नागरिक तैयार करें जो अपने देश प्रदेश का नाम रोशन करें।
उद्योग मंत्री ने अध्यापक संगठन की ओर से अध्यापकों के हित में मांगो को पूरा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि शासन द्वारा अध्यापकों के हित में उचित निर्णय लिये जायेंगे।
इससे पूर्व अध्यापक संगठन के प्रांताध्यक्ष, कार्यवाहक अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष चंद्रोदय मिश्रा ने अपने संबोधन में अध्यापकों के हित और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विभिन्न मांगे रखीं। इस दौरान छात्राओं द्वारा स्वागत

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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