समाचार

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के सफलता की अनुगूंज सभी दिशाओं में सुनाई दे रही है – राजेन्द्र शुक्ल


मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश के साथ आज जिला मुख्यालय में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें योजनान्र्तगत जिले से शामिल हुए तीर्थयात्रियों ने अपने अनुभव व सुझाव व्यक्त किये।
स्थानीय कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के सफलता की अनुगूंज चारों ओर सुनाई दे रही है बुजुर्गो के मन से निकली आवाज संतोष की पराकाष्ठा बयान करती है। इससे यह सिद्ध होता है कि प्रदेश की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ यह योजना सबसे सफलतम योजनाओं में शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि तीर्थदर्शन यात्रा बुजुर्गो को आध्यात्मिक त्रप्ति देती है। हमारे इन वरिष्ठ नागरिकों का प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है जिसे दृष्टिगत रख संवेदनशील मुख्यमंत्री जी ने यह योजना प्रारंभ की जिससे ऐसे वरिष्ठजन तीर्थयात्रा में जा पाने में सक्षम हो सके जो किन्ही कारणोंवश तीर्थ नहीं कर सकते थे। उद्योग मंत्री ने जिले के धार्मिक स्थलों को विकसित एवं साफ-सुथरे व सजाने सवारने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की यह अभिनव योजनाओं में से एक है जिसके माध्यम से उन्होंने प्रदेश के वरिष्ठजनों को तीर्थयात्रा कराने का अपना धर्म निभाया। सांसद ने जिले से जाने वाली आगामी तीर्थयात्रा में वरिष्ठजनों के साथ स्वयं चलने की भी बात कही।
इससे पूर्व जिले के तीर्थयात्रियों मधुकर पाण्डेय, सोमदत्त चतुर्वेदी, केशव प्रसाद मिश्रा, गिरिजा प्रसाद, हरगोविंद सिंह तिवारी, राजेश पाण्डेय व माधवी द्विवेदी ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री आधुनिक श्रवण कुमार हैं जिन्होंने पुनीत, पावन व आध्यात्मिक चेतना जगाने वाली यह योजना प्रारंभ की जिससे जीवन के अंतिम पड़ाव में बुजुर्गों को समस्त सुख सुविधाओं, खान-पान की व्यवस्था के साथ तीर्थ करने का अवसर मिल पा रहा है।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...