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राष्ट्रपति ने प्रदान किए राष्ट्रीय खेल पुरस्कार


राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में क्रिकेट खिलाड़ी चेतेश्वर पुजारा और हरमनप्रीत कौर सहित 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार प्रदान किए गए।
खेल रत्न से नवाजे गए देवेंद्र झाझरिया ने 2016 में रियो पैरालिंपिक में जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले झाझरिया 2004 के एथेंस पैरालिंपिक में भी जैवलिन थ्रो का गोल्ड जीत चुके हैं। खेल रत्न जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी सरदार सिंह लंबे समय से भारतीय हॉकी टीम के सदस्य हैं। वे ओलिंपिक और एशियाई खेलों में शिरकत कर चुके हैं और भारत को कई यादगार जीत दिलाने में उनका ख़ास योगदान रहा है।

अर्जुन पुरस्कार: चेतेश्वर पुजारा (क्रिकेट), हरमनप्रीत कौर (क्रिकेट), वरुण सिंह भाटी (पैरा एथलीट), प्रशांति सिंह (बास्केटबॉल), एसएसपी चौरसिया (गोल्फ), ओनम बेमबेम देवी (महिला फुटबॉल), साकेत मिनैनी (टेनिस), मरियपन्न थंगावेलू (पैराएथलीट), वीजे सुरेखा (तीरंदाजी), खुशबीर कौर (एथलेटिक्स), आरोकिया राजीव (एथलेटिक्स), एसवी सुनील (हॉकी), सत्यव्रत कादियान (कुश्ती), एंथोनी अमलराज (टेबल टेनिस), पीएन प्रकाश (निशानेबाजी), जसवीर सिंह (कबड्डी) और देवेंद्रो सिंह (मुक्केबाजी)

द्रोणाचार्य पुरस्कार: स्वर्गीय डॉ रामकृष्णन गांधी (एथलेटिक्स) और हीरानंद कटारिया (कबड्डी)

लाइफटाइम द्रोणाचार्य पुरस्कार: जीएसएसवी प्रसाद (बैडमिंटन), बृजभूषण मोहंती (मुक्केबाज़ी), पीए रफेल (हॉकी), संजय चक्रवर्ती (निशानेबाज़ी), रोशन लाल (कुश्ती)

ध्यानचंद पुरस्कार: भूपेंद्र सिंह (एथलेटिक्स), सैयद शाहिद हकीम (फुटबॉल), सुमरई टेटे (हॉकी)

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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