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प्रदेश में रेत खनन तथा विपणन की नई नीति के लिए नागरिकों से सुझाव 5 सितम्बर तक आमंत्रित


सुझाव वेबसाइट पर दिए जा सकेंगे

प्रदेश की रेत खनन तथा विपणन की नई नीति के लिए नागरिकों से से सुझाव 5 सितम्बर 2017 तक आमंत्रित किए गए है। सुझाव वेबसाइड पर दिए जा सकेंगे। प्रस्तावित नई नीति को खनिज विभाग की वेबसाइट ekhanij.mp.gov.inएवं म.प्र. शासन की वेबसाइट mp.mygov.in पर प्रदर्शित किया गया है।

प्रस्तावित नई नीति में मुख्य रूप से प्रस्तावित किया गया है कि खदानों का चिन्हांकन खसरा के आधार पर न करके रेत के भौगोलिक विस्तार को आधार लिया गया है, जिसकी खनन योजना आवश्यक पर्यावरण अनुमति कलेक्टर द्वारा ली जायेगी। रेत हार्वेस्टिंग एवं विक्रय का कार्य अलग-अलग ऐजेंसी के माध्यम से डिपो पर संग्रहित कर वहां से किया जायेगा।

इसी प्रकार खदानों का संचालन पंचायतों एवं स्थानीय निकाय के नियत्रंण के अधीन होगा। डिपो पर रेत का विक्रय ऑनलाईन रेत बुकिंग पोर्टल के माध्यम से और डिपो पर रेत की दर का निर्धारण पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर जिला स्तर पर गठित एक समिति के द्वारा किया जायेगा। रेत का परिवहन पंजीकृत वाहनों से प्रस्तावित किया गया है।

खदानो के संचालन से प्राप्त रायल्टी राशि में से 50 प्रतिशत राशि संबंधित ग्राम पंचायत/नगरीय, 30 प्रतिशत राशि जिला कलेक्टर तथा 20 प्रतिशत राशि राज्य शासन/निगम को प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है। नागरिकों को रेत परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये सेण्ड ट्रांसपोर्ट टेक्सी की व्यवस्था किये जाने का प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि नई नीति के लिए खनिज विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर कि एक कार्यशाला आयोजित कि गई थी। इसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, पर्यावरणविद तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुये थे। इसके बाद खनिज विभाग द्वारा रेत खनन एवं विपणन नीति का प्रारूप तैयार कर इस पर प्रदेश के सभी आयुक्त, आई.जी, कलेक्टर एस.पी. तथा जन सामान्य से सुझाव आमंत्रित किये गये थे। इन सुझावों के परीक्षण उपरांत तेलंगाना, छत्तीसगढ़ राज्य एवं प्रदेश में वर्तमान में प्रचलित रेत खनन नीति को समाहित करते हुये विभाग द्वारा नवीन रेत खनन एवं विपणन नीति तैयार की गई है ।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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