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भारत को चाबहार बन्दरगाह पर 2018 में परिचालन आरम्भ होने की उम्मीद- नितिन गडकरी


सड़क परिवहन व राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री श्री नितीन गडकरी ने कहा कि सरकार ईरान में चाबहार बन्दरगाह के विकास के लिए कृत संकल्प है। आशा है कि 2018 में इस पर परिचालन आरम्भ हो जाएगा। श्री नीतिन गडकरी आज तेहरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा दूसरी बार कार्यभार संभालने पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के तौर वहां गए है। ईरान दौरे की पूर्व संध्या पर मंत्री महोदय ने कहा कि भारत व ईरान के बीच प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध है।

श्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि चाबहार बन्दरगाह पर निर्माण कार्य पहले से आरम्भ हो गया है। भारत सरकार ने बन्दरगाह के विकास के लिए छः बिलियन रूपये आबंटित किये हैं। इनमे से उपकरणों के लिए 380 करोड़ रुपये धनराशि की निविदा को पहले से अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के लिए ईरान सरकार आवश्यक अनुमोदनों को स्वीकृति प्रदान कर देगी। श्री गडकरी ने कहा कि चाबहार बन्दरगाह दोनों राष्ट्रों के सम्बन्धों एवं इस क्षेत्र में व्यापार एवं कारोबार को बढ़ावा देगा।

चाहबहार बन्दरगाह दक्षिण पूर्वी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है। यह बन्दरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है। पिछले साल मई में भारत और ईरान के बीच हुए सम्झौते के अनुसार भारत चाहबहार बन्दरगाह के पहले चरण के लिए दो बर्थ शुरू और उपकरणों से लैस करेगा। 10 वर्ष की लीज पर 85.21 मिलियन (अमरिकी डॉलर) का पूञ्जी निवेश किया जाएगा और वार्षिक राजस्व 22.95 मिलियन होगा।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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