समाचार

ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश के इकलौते पु. वा. प्र.शाला के भवन का लोकार्पण तथा पुस्तकालय भवन का शिलान्यास किया


प्रदेश के ऊर्जा, जनसम्पर्क एवं खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज मध्यप्रदेश पुलिस वाहन प्रशिक्षण नौबस्ता रीवा के प्रिफैव से निर्मित अस्थाई भवन का लोकार्पण किया। इसके साथ ही म.प्र. पुलिस वाहन प्रशिक्षण शाला रीवा के पुस्तकालय भवन का शिलान्यास भी इस अवसर पर उनके द्वारा किया गया। इस दौरान ऊर्जा मंत्री तथा विधायक नीलम मिश्रा ने प्रशिक्षण शाला परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भवन निर्माण के लिये भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने जिस समन्वय के साथ कार्य किया वह सराहनीय है। विकास के कार्यों में इसी प्रकार की पारस्परिक सहयोग की भावना प्रदर्शित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिये गौरव की बात है कि प्रदेश का इकलौता पुलिस वाहन प्रशिक्षण स्कूल रीवा में है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि नौबस्ता में इस संस्थान को संचालित करने के लिये पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शाला के नौबस्ता में स्थानान्तरित हो जाने से इनके द्वारा रिक्त हुए स्थान पर सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल बनेगा जो रीवा के लिये उपलब्धि की बात होगी और रीवा चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर होगा। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा में विकास के नये-नये मानक बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही रीवा में एअर पोर्ट बनेगा और नियमित विमान सेवा भी शुरू होगी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में क्षेत्रीय विधायक नीलम मिश्रा ने प्रशिक्षण शाला भवन के उनके क्षेत्र में बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की। कलेक्टर राहुल जैन ने अपने उद्बोधन में पुलिस वाहन प्रशिक्षण शाला भवन परिसर के विकास और निर्माण के लिये सांसद एवं विधायक द्वारा अपनी निधि से 25-25 लाख रूपये प्रदान करने का उल्लेख करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। इसके साथ ही जे.पी. सीमेंट के प्रबंधकों द्वारा इस कार्य में सहयोग देने के लिये उनके प्रति भी धन्यवाद प्रकट किया। निर्माण एजेन्सी एच.पी.एल. के निदेशक संजीव गुप्ता ने भवन निर्माण की प्रक्रिया और तकनीकी की जानकारी देते हुए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। पुलिस अधीक्षक वाहन प्रशिक्षण शाला रीवा वैष्णव शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...