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हथिनी रूपकली माँ बनी


270217n3पन्ना टाइगर रिजर्व में हथिनी रूपकली ने कल स्वस्थ मादा शावक को जन्म दिया। रूपकली और उसकी बेटी रूपहली दोनों स्वस्थ है। रूपहली के जन्म के साथ रिजर्व में हाथियों की संख्या 15 हो गई है।

हथिनी रूपकली और अनारकली को सोनपुर मेले में से खरीद कर लाया गया था। रूपकली इसके पहले 5 और सन्तानों को जन्म दे चुकी है। हाथियों का रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।

हाथी प्रभारी श्री उदयमणि सिंह परिहार ने बताया कि रूपकली की आयु लगभग 55 वर्ष है और उसके 6 बच्चों में 5 जीवित है, जो पार्क की सुरक्षा में लगे हैं। हाथी सुबह जंगल में चरते हैं। शाम के खाने में 9 किलो आटा, एक किलो बेसन और 250 ग्राम नमक की रोटी बनाके खिलाई जाती है। पार्क की सबसे उम्रदराज दन्त विहीन हथिनी वत्सला को हरा चारा न खा पाने के कारण सुबह दलिया और शाम को 5-5 किलो का गेहूँ-चावल का लड्डू दिया जाता है

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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