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सफेद बाघिन राधा की मृत्यु एक दुःखद समाचार

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03 अप्रैल 2016 को विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी का शुभारंभ रीवा के पास सतना जिले के मुकुन्दपुर में माद के जंगल में किया गया । आज लगभग सभी को मालुम है कि विश्व का पहला सफेद बाघ रीवा जिले के सीधी के बरगड़ी के जंगल में तत्कालीन रीवा महाराज मार्तण्ड सिंह जूदेव के द्वारा पकड़ा गया था और आज जो भी सफेद बाघ दुनिया में हैं वह सब उसी सफेद बाघ मोहन के वंशज हैं लेकिन लगभग 40 वर्षों का समय ऐसा रहा जब रीवा से ही सफेद बाघ का नाता टूट गया था। वर्तमान विधायक, मंत्री, मध्य प्रदेश शासन श्री राजेन्द्र शुक्ल के विशेष प्रयास से वह दिन भी आया जब यह व्हाइट टाइगर सफारी बनकर तैयार हुई और पुनः मोहन के वंशजों ने अपनी दहाड़ से विन्ध्य को गुंजायमान कर दिया। जैसे-जैसे सफारी का प्रचार-प्रसार हो रहा है वैसे-वैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है और जो भी इस सफारी को देखता है बिना अद्भुत कहे रह नहीं पाता है। प्राकृतिक वातावरण में निर्मित इस खूबसूरत व्हाइट टाइगर सफारी में 3 सफेद बाघ आये थे जिनमें दो मादा और एक नर था लेकिन दुख की बात यह है कि उनमें से एक मादा राधा बाघिन नहीं रही। यह बड़े दुख का विषय है लेकिन दुख से निकलकर पुनः सफारी की प्रगति के लिए कर्मचारी कार्यरत हो गए हैं। कुछ दिन पहले नर बाघ के साथ मेटिंग के समय राधा बाघिन चोटिल हो गई थी तब से उसका इलाज चल रहा था लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी तबियत और बिगड़ी तथा डाॅक्टरों के लाख प्रयास के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। सफारी में वर्तमान में अच्छी कमाई है और रोज हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। शासन के स्तर पर सफारी के लिए तो बजट है ही लेकिन इतनी अच्छी कमाई सफारी के पर्यटकों से हो जाती है जिससे यहां के वन्य जीवों की बेहतर देखभाल हो पाती है। पिछले दिनों पूरा देश, मध्यप्रदेश, और रीवा भी बाढ़ प्रभावित रहा और इस बाढ़ से प्रभावित मुकुन्दपुर का यह व्हाइट टाइगर सफारी भी हुआ। बाढ़ ने यहां काफी क्षति पहुंचाई थी उस क्षति की पूर्ति के लिए कार्य लगातार चल रहे हैं टूटी हुए दीवालों की मरम्मत, आदि का काम होना है इन सब के साथ लगातार सफारी के अन्य बाड़ों का विकास कार्य भी चल रहा है। इस सफारी का पूरा प्रोजेक्ट लगभग 2024 तक पूर्ण होना है इस कारण यहां लगातार विकास कार्य चलते रहते हैं लेकिन जितने जानवर आज यहां है उतने से ही सफारी गुलजार है और दिन दूनी रफ्तार से पर्यटक सफारी में बढ़ रहे है। ऐसे में राधा बाघिन की मृत्यु एक बड़ी दुखद घटना है राधा की मृत्यु लगभग09:30 बजे रात को हुई जिसकी उम्र लगभग 5 वर्ष की थी रघु और राधा सफेद बाघ बाघिन को मैत्री पार्क भिलाई से यहां लाया गया था तथा इसके पहले विन्ध्या नाम की सफेद बाघिन को भोपाल से यहां लाया गया था रघु और विन्ध्या के बीच में भी मेटिंग हुई है जिससे आगे के वंश वृद्धि की उम्मीद भी विभाग द्वारा लगाई गई है लेकिन विभाग द्वारा यह भी बताया गया है कि कई बार इनमें फाल्स मेटिंग भी होती है जब तक पूर्ण रूप से विन्ध्या में गर्भधारण के लक्षण न दिखने लगे तब तक हम कोई भी घोषणा नहीं कर सकते हैं फिर भी हम सब उम्मीद करेंगे कि एक दुःखद समाचार के बाद विन्ध्या की तरफ से कुछ सुखद समाचार आए और सफारी में सफेद बाघ की वंश वृद्धि हो मोहन का वंश आगे बढ़ें। यह सफारी दुनिया की बेहतरीन सफारी में से एक है जहां पूरे नियम कानून के साथ विश्वस्तरीय मैनुअल का पालन किया जाता है आर्थिक रूप से समृद्धशाली सफारी है हम उम्मीद करते हैं कि विकासशील अवस्था के दौरान जो कमियां रहती हैं उसे समय के साथ पूरा करते हुए भविष्य में यह एक पूर्ण विकसित सफारी के रूप में विश्व के सामने होगी जिसमें पैदा हुए सफेद बाघों के शावक धमा चकौड़ी करते हुए पर्यटकों को आनंदित करते हुए विन्ध्य की गौरव गाथा का मान बढाएंगे। दुख की घड़ी में सुखद भविष्य की कल्पना करना सकारात्मक और प्रगतिवादी सोच ही इस मान सम्मान को मंजिल तक पहुंचने में मदद करेगी। राधा को भाव-भीनी श्रद्धांजली के साथ ………..

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