समाचार

पीएम नरेन्द्र मोदी ने सीपीईसी को लेकर शी के समक्ष चिंता व्यक्त की


s2016090487999

भारत ने पी ओ के  से होकर गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे :सीपीईसी: और ‘क्षेत्र से पैदा होने वाले’ आतंकवाद पर आज चीन के समक्ष अपनी चिंता जाहिर की । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे के रणनीतिक हितों के प्रति ‘संवेदनशील’ होना चाहिए ।
मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ‘राजनीतिक हितों’ से प्रेरित नहीं होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि स्थायी द्विपक्षीय संबंधों को सुनिश्चित करने के लिए ‘‘यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम एक दूसरे की महत्वाकांक्षाओं, चिंताओं और राणनीतिक हितों का सम्मान करें ।’’ जी-20 सम्मेलन के अलग  शी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले 46 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे :सीपीईसी: पर चिंता जाहिर की । उर्जा से जुड़ी कई परियोजनाओं के अलावा सीपीईसी में ग्वादर बंदरगाह से पाक अधिकृत कश्मीर के रास्ते शिनजियांग के काशघर तक तेल और गैस ले जाने के लिए रेल, सड़क और पाइपलाइनें हैं ।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप से जब पूछा गया कि क्या सीपीईसी वाले क्षेत्र से पैदा हो रहे आतंकवाद के बारे में चर्चा हुई, तो उन्होंने पत्रकारों को बताया कि यह मुद्दा बैठक के दौरान उठाया गया है ।
भारत की चिंताएं जाहिर करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों को ही एक दूसरे के रणनीतिक हितों के प्रति ‘संवेदनशील’ होने की जरूरत है । उन्होंने ‘नकारात्मक धारणा को बढ़ने से रोकने’ के लिए विशिष्ट कदम उठाने का आह्वान किया ।
विकास स्वरूप ने शी के साथ चली लगभग 35 मिनट की बैठक में मोदी द्वारा उठाए गए मुद्दों की संक्षिप्त जानकारी देते हुए कहा, सैद्धांतिक तौर पर, दोनों देशों को एक दूसरे के रणनीतिक हितों के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा ।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...