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अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई के आलोक में मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी – अजय नारायण त्रिपाठी “अलखू “


white tiger

दिनांक 03 अपैल 2016 आज मुकुंदपुर टाइगर सफारी सतना की चर्चा काफी बढ़ गई है साथ ही यहां चहल-पहल भी उसी गति से बढ रही है। सुबह से ही यहां लोगों का आना जाना प्रारंभ हो गया, यह रीवा के पास सतना जिले का वह मांद जंगल है जहां विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी, जू, रेस्क्यू तथा ब्रीड़िंग सेंटर बनाया गया है विन्ध्य क्षेत्र के इस नैसर्गिक वन में बनी इस टाइगर सफारी का आज लोकार्पण होना है मैं तो इसके भूमि पूजन अवसर से लेकर लगातार बीच-बीच में यहां आता रहा हूँ लेकिन आज यहां का नजारा अदभुत है चारों तरफ उत्सव उल्लास का वातावरण है। ऐसा लग रहा है मानों परिवार का कोई वर्षो पूर्व बिछड़ा प्रिय सदस्य आज वापस मिल गया हो।
इस व्हाइट टाइगर सफारी का लोकापर्ण का समय 3 बजे दोपहर रखा गया है जो कि केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय इस्पात मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, और प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के हांथों इस गौरवशाली कार्य के भगीरथ प्रदेश के ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय उर्जा, खनिज साधन तथा जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के उपस्थित में होना है इस कार्य के मुख्य सूत्रधार श्री राजेन्द्र शुक्ल जी ही हैं और पालक मुखिया के रूप में जिनका आशीर्वाद मिला है वह प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान है। इस कार्यक्रम के साथी सहयोगी और गवाह बनने के लिए हजारों जनप्रतिनिधि तथा लाखों की संख्या में जनता पहुंच चुकी है, चारों तरफ लोगों का केवल हुजूम ही नजर आ रहा है, चाहे सतना से आने वाला रास्ता हो चाहे सीधी से चाहे रीवा से बाढ के रेले की तरह जनता आ रही है आखिर आये भी क्यों न यह विन्ध्य के भावना, वैभव, गौरव का विषय है।
आगे बढ़ने से पहले सफेद बाघ की कहानीे में नजर डालना जरूरी है वैसे भी बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है और उस राष्ट्रीय प्रतीक में सफेद बाघ की अनुपम अदभुत सुंदरता का कहना ही क्या है ।
वर्तमान सीधी जिले के बरगड़ी जंगल में शिकार के दौरान तत्कालीन रीवा महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव ने सफेद बाघ के शावक को 27 मई 1951 में पकड़ा था इस शावक का नाम उन्होने मोहन रखा यह नाम भी स्वाभाविक ही था क्योंकि यह सबके मन को मोहने वाला खूबसूरत शावक था इसलिए इसका मोहन नाम सर्वथा अनुकूल रहा ।
इसी मोहन को गोविन्दगढ़ के किले में रखा गया और यहां युवा मोहन एवं राधा नामक बाघिन के संसर्ग से सफेद शावक सन्ताने उत्पन्न हुई तदनन्तर यहीं से सफेद बाघ का कुनबा बढ़ चला।
ताउम्र मोहन इसी गोविन्दगढ़ के किले में महाराजा की तरह रहा और इसकी संतति विश्व में फैलती रही। आज इस दुनिया में जहां भी सफेद बाघ उपलब्ध हैं वह सब इसी मोहन बाघ के वंशज हैं।
30 अक्टूबर 1958 को मोहन और राधा के संयोग से जिन 4 शावकों ने जन्म लिया था उनमें से चारों सफेद शावक थे मोहन 19 वर्ष के जीवन काल में कुल 34 शावकों का पिता बना उनमें से 21 शावक सफेद थे। दुनिया को सफेद बाघ संतान देकर मोहन 18 दिसम्बर 1969 को इस दुनिया से चला गया, लेकिन मोहन ने अपनी वंशवेलि के रूप में विश्व को ऐसा अनुपम उपहार दिया है जिससे विश्व हमेशा चमत्कृत रहेगा और यह सब जिस स्थान पर हुआ वह है रीवा की पावन भूमि ।
मोहन और सुकेषी की संतान राजा और रानी सफेद बाघ 25 जून 1963 को दिल्ली प्राणी उद्यान पहुंचे। यहां से उनकी संतान फली फूली और देश तथा विदेश में अपने अदभुत रंगरूप के आकर्षण के साथ पहुंची।े रीवा के गोविन्दगढ़ में विराट नामक सफेद बाघ अंतिम था। जुलाई 1976 में इस विराट की मृत्यु के बाद रीवा सफेद बाघ विहीन हो गया साथ ही राजनैतिक परिस्थितियां भी विपरीत होती गयी विन्ध्य का गौरव सफेद बाघ यहां के लिए केवल किस्से कहानियों का गायन विषय बनकर रह गया।
विडाल वंशी इस खूबसूरत जीव का यह क्षेत्र प्राकृतिक पर्यावास है। पीले बाघ आज भी यहां गर्जना करते विहार करते हैं, लेकिन उन्हीं के बीच से प्रकृति द्वारा दी गई अनुपम कृति सफेद बाघ अपने जन्मभूमि से विलुप्त हो चुके थे।
अभाव बड़े कौतूहल का सृजनकर्ता है। विन्ध्य क्षेत्र के गौरव गाथा में पहला नाम तो जरूर सफेद बाघ का लिया जाता लेकिन नाम लेने के साथ ही मायूसी का वातावरण निर्मित हो जाता था, यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि वह गौरव अपने जन्म स्थली से ही नदारद था।
1976 के आसपास के किशोर, युवा तथा बाद की पीढ़ी के लिए यह कौतूहलता बड़े अचरज का निर्माण करती थी। लोग कहते ऐसा कैसे हो सकता है कि हमारा गौरव हमसे ही परे है। जो सक्षम थे वह दिल्ली आदि के चिड़ियाघरों में जब सफेद बाघ देखकर आते और यहां के लोगों को उसकी खूबसूरती का बखान करते तो उससे खुशी होने के साथ अपने विन्ध्य में सफेद बाघ न होने का गम भी सताने लगता। यह विषय पूरी तरह भावनाओं का विषय था इसमें किन्तु परन्तु की कोई जगह नही है ।
उस समय के अन्य किशोर वय बालक युवा की तरह 12 वर्षीय राजेन्द्र शुक्ल भी किस्से कहानियां सुन कर बड़े हो रहे थे। इन किस्से कहानियों और गौरव गान से एक बात मन में बैठ गई कि सफेद बाघ हमारी पहचान है और इसे अपनी जन्मभूमि में वापस आना चाहिए। समय बीता राजेन्द्र शुक्ल रीवा विधायक के रूप में रीवा के जनप्रतिनिधि बने और आपने अपने इस सपने को साकार करने का काम तुरंत प्रारंभ कर दिया। इस मानसिक संकल्पना के साथ आप मध्यप्रदेश शासन के वन मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं देना प्रारंभ कर पहली ही विभागीय बैठक में अधिकारियों को सफेद बाघ मोहन के वंशजों को अपनी जन्मभूमि में वापस लाने के लिए परिचित करा दिया। संकल्प की दृढ़ता और परिश्रम की पराकाष्ठा थी कि 3 फरवरी 2012 को मुकंुदपुर के मांद जंगल में व्हाइट टाइगर सफारी निर्माण का भूमि पूजन सम्पन्न हो गया।
निर्माण कार्य की प्रगति निरीक्षण कार्य राजेन्द्र शुक्ल जी की दिनचर्या बन गया और आखिरकार सपने को साकार होने का वह दिन भी आ गया जब 9 नवम्बर 2015 को मोहन के वंशज के रूप में राजकुमारी विन्ध्या बाघिन ने मुकुंदपुर मांद की व्हाइट टाइगर सफारी में अपने पूर्वजों की जन्म भूमि पर पैर रखे। वह दिन भी अति उत्सव का दिन था पूरा विन्ध्य सड़कों पर था जिस रास्ते से विन्ध्या अपने पूर्वजों की भूमि पर आ रही थी उस रास्ते पर विन्ध्यवासी कई घंटे खड़े रहकर उसके रास्ते में फूल बर्साये जा रहे थे जिस वाहन से वह आ रही थी उस पर मालाएं पहनायी जा रहीं थीं, पूरा विन्ध्य उत्साहित और उल्लासित था। मैं स्वयं उस दिन इस पूरे भावुक पलों का साक्षी रहा हूं। लोग खुशी के मारे विन्ध्या के दर्शन के लिए चारों ओर से दौड़ रहे थे बड़ा ही मनोहारी दृश्य था। मेरा सौभाग्य था कि जो टीम विन्ध्या को जंगल के अंदर उसके बाड़े तक लेकर गयी थी उस टीम में मैं भी था। पूरा वातावरण हर्ष का था, बच्चे बूढे जवान, बड़े पदों पर बैठे हमेशा गंभीर मुद्रा में रहने वाले लोग, विंध्या के दीदार के लिए बच्चों की तरह उछल रहे थे वाकई वह अद्भुत दृश्य था चारों तरफ केवल विन्ध्या – विन्ध्या का गान सुनाई दे रहा था।
इसके बाद सफेद बाघ रघु और बाघिन राधा आई, पीले बाघ बाघिन का एक जोड़ा आया , भालू आये, हिरण आये, साथ में अन्य जीव आये। अभी भी यह क्रम लगातार जारी है इसी के साथ इस सफारी के लोकार्पण की तिथि के निर्धारण की बात भी होने लगी और आखिर वह तिथि भी निर्धारित हो गई 3 अपै्रल 2016।
क्योंकि रोज ही हजारों की तादात में जनता अपने गौरव के दीदार के लिए पहंुच रही थी। शासन, प्रशासन जनप्रतिनिधि सभी पर बड़ा दबाव था हर कोई इन सफेद बाघों का दीदार करना चाहता था जो किस्से कहानियां 40 वर्षों से सुन रहे थे उसके यथार्थ होने का समय था।
3 अप्रैल 2016 के ऐतिहासिक अविस्मरणीय दिन का कहना ही क्या है, कहावत कहते हैं कि, ऐसे भागे जा रहे हो जैसे बाघ देख लिया हो, आज यहा उल्टा था लोग भागे तो चले जा रहे थे मुकुंदपुर की ओर लेकिन इसके लिए नहीं कि बाघ देख लिया हो, भागे जा रहे थे बाघ देखने के लिए अपनी गौरव वैभव पहचान से नजरें मिलाने के लिए दिल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के लिए धन्यवाद भरे यह अपार जन सैलाब सफेद बाघ मोहन को वंशज अपने गौरव से साक्षात्कार करने ।
लाखों की भीड़ के बीच अतिथिगण लोकार्पण के लिए पहुंच चुके थे हर्षोल्लास भरा कौतूहल बढ़ता जा रहा था मंत्रोच्चार के बाद जैसे ही व्हाइट टाइगर सफारी गेट के उपर लगे विशाल पर्दों का अनावरण हुआ तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। लोकार्पण पश्चात केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, नरेन्द्र सिंह तोमर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान उनकी धर्म पत्नी श्रीमती साधना सिंह वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार, आदिम जाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह इस प्रोजेक्ट के भगीरथ उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल उनकी धर्म पत्नी श्रीमती सुनीता शुक्ल, सांसद, विधायक अन्य जनप्रतिनिधि निरीक्षण के लिए चले । बैट्री चलित कार जो विशेष रूप से यहां घूमने के लिए मंगाई गई हैं उनमें से एक कार की ड्राइविंग सीट राजेन्द्र शुक्ल जी ने सम्भाली और मुख्यमंत्री जी सहित अन्य गणमान्य पीछे बैठे। भ्रमण दौरान जैसे ही अतिथिगण यलो टाइगर के बाड़े के पास पहुंचे बाघों की चहल कदमी से सभी रोमांचित हो उठे।
आगे सफेद बाघ रघु और राधा के बाड़े हैं इनके बाड़े के सामने पहुंचते ही पूरा अतिथि मंडल बच्चांे सी सहजता और सरलता से प्रफुल्लति होकर इस प्रकृति के अनुपम कृति को निहारने लगा, तभी रघु बाघ के सामने कुछ दूरी पर एक बंदर आकर आंखें तरेरने लगा और उसकी यह हरकत भला रघु कैसे बर्दाश्त करता उसने उस पर झपट्टा मारा, बंदर भी होशियार वह कूदकर वही बगल के पेड़ पर पहुंच गया रघु ने भी दौड़ लगाई और ऐसा प्रयत्न किया कि वह पेड़ पर चढकर बंदर को सबक सिखाएगा, यह नजारा देखकर पूरा अतिथि मंडल रोमांच और आनंद से अभिभूत हो गया।
इस वाकये का जिक्र्र करते हुए प्रकाश जावड़ेकर जी ने अपने उद्बोधन में यह कहा भी कि यह ऐसा दृश्य था जैसा हम सब डिस्कवरी चैनल में देखते हैं उन्होने कहा ऐसा नजारा अपने जीवन में कभी नहीं देखा था।
मुख्यमंत्री जी अति प्रसन्न मुद्रा में भाव विभोर होकर इस वाकये का वर्णन कर रहे थे उन सभी अतिथियों के मुंह से अदभुत, अद्भुत विस्मयकारी शब्द निकल रहा था।
आगे के बाड़े में भालू देखने के बाद अतिथि गणों का दल टाइगर सफारी में घूमने के लिए व्हाइट टाइगर सफारी के उस भाग में चला जहां विन्ध्या का साम्राज्य है यहां खुले में विचरण करती विन्ध्या है और बस के अंदर बैठे उसके दर्शनार्थी। यहां का जंगल क्षेत्र बड़ा ही मनोहारी है। इस क्षेत्र में कैथे के पेड़ बहुतायत में है सागौन , शीशम, तथा कैथा यहां विषेष रूप से है नैसर्गिक वातावरण नदी का किनारा अंदर बहते हुए जलस्रोत कैथे के पेड़ पर लगे फल और पक कर गिरे फलों के लिए यहां आदमी लालच से भर जाता है। क्योंकि अब यहां विन्ध्या का राज है इसलिए लालच और मुंह में आई लार को अंदर ही गुटकने में फायदा रहता है। हां जब विन्ध्या अपने बाड़े में भोजन और आराम के लिए चली जाती है तब जरूर इन फलों को उठाया जा सकता है सफारी के बाहरी भाग में भी यह बहुतायत में पाये जाते हैं ज्यादातर लोग इस क्षेत्र से ही इन्हें बीनकर चटकारे लेकर खाते हैं। अंग्रेजी में कैथे को एलीफेंट बाल कहते है, हो सकता है हाथियों को यह बहुत पसंद हो। अतिथिगण बस से सफारी का भ्रमण कर ही रहे थे कि राजकुमारी विंध्या मस्त चाल में घूमती नजर आयीं बस खड़ी कर दी गई सभी एकटक विन्ध्या को निहारने लगे इस ऐतिहासिक स्मृति को हर कोई अपने स्मृति पटल पर स्थायी रूप से अंकित कर लेना चाहता था। कुछ देर बाद विन्ध्या मदमस्त चाल में घूमते हुए आगे निकल गयी आनन्द रोमांच से भरे अतिथिगण सफारी के बाहर आये सफारी के गेट में ही सफेद बाघ की सचित्र कहानी बताने के लिए एक गोल घर बनाया गया है जिसमें चारों ओर आदमकद फ्रेम में सफेद बाघ की सचित्र कहानी का चित्रण तथा विवरण दिया गया है। यह ज्ञानवर्धन वाला क्षेत्र है सफेद बाघ के बारे में उठने वाली सभी जिज्ञासाओं का समाधान इस सचित्र गोलघर गैलरी में होता है। कुल 100 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में इस जू तथा सफारी का निर्माण है जिसमें 75 हैक्टेयर में जू तथा 25 हेक्टेयर में सफारी है, प्राकृतिक जंगल और वातावरण होने के कारण इसकी छटा निराली है ।
लोकार्पण तथा भ्रमण निरीक्षण के बाद अतिथि मंचीय कार्यक्रम के लिए पधारे लाखों की भीड़ में जिस तरह से इन अतिथियों ने अपने अनुभव उद्गार व्यक्त किये वह अद्वितीय थे।
सतना सांसद अपने क्षेत्र के विकास से अभिभूत थे अपने गौरव पहचान को पाकर अभिभूत थे और इस कार्य को मूर्तरूप देने वाले मुख्यमंत्री जी और राजेन्द्र शुक्ल के प्रति धन्यवादमय थे ।
महाराज मार्तण्ड सिंह जू देव जिनका नाम मोहन का पर्यायवाची है मार्तण्ड और मोहन एक दूसरे के पूरक हैं, उन महाराज मार्तण्ड सिंह जू देव के पुत्र पूर्वमंत्री पुष्पराज सिंह ने मुक्त कंठ से राजेन्द्र शुक्ल के भागीरथ प्रयास की सराहना की इस पूरे कार्यक्रम का उन्हें हीरो बताते हुए धन्यवाद दिया। शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व को जिनके सफल मार्गदर्शन में विन्ध्यवासियों के साथ प्रदेशए देश तथा विश्व को पहली व्हाइट टाइगर सफारी का अतुल उपहार मिला। उनके प्रति पुष्पराज सिंह जी ने आभार व्यक्त किया ।
प्रदेश के विधानसभा उपाध्यक्ष तथा अमरपाटन विधायक राजेन्द्र सिंह जी जिनके विधानसभा क्षेत्र का मुकुंदपुर भाग है उनके पास शायद आज शिवराज और राजेन्द्र की तारीफ के लिए शब्द कम पड़ गये थे। राजेन्द्र सिंह जी विद्वान जनप्रतिनिधि हैं उच्च शिक्षित हैं क्योंकि सफेद बाघ से भावनात्मक लगाव होने के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र में इस विश्व की एक मात्र व्हाइट टाइगर सफारी होने के कारण आप प्रसन्नता सेे ओत प्रोत हो रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो आपने आज सबकुछ पा लिया हो शिवराज और राजेन्द्र की तारीफ करते आपके होंठ नहीं थक रहे थे। आपकी राजनैतिक पार्टी दूसरी है लेकिन सफेद बाध की पहचान जो पूरे विंध्य की एक है इसका परिचायक आपका एक-एक शब्द था।
रीवा संासद जनार्दन मिश्र के लिए भी यह कार्य किसी सपने के सच होने के ही जैसा है वह भी रीवा के उसी पीढ़ी के नागरिक हैं जिन्होने केवल सफेद बाघ के किस्से सुने थे आज अपने गौरव वैभव को पाकर वह गद्गद् थे। रीवा विधायक और प्रदेश के मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की तारीफ में वह भावविहवल स्थित में थे, प्रसन्नता का यह आलम था कि वह अपनी सुखानुभूति बघेली मंे व्यक्त कर रहे थे। यहां भी वही शिवराज के नेतृत्व और राजेन्द्र की दृढ़ता का गुणगान था साथ ही नरेन्द्र सिंह तोमर तथा प्रकाश जावड़ेकर जी के सहयोग का जिक्र। बाघ, बघेल, बघेली के इस क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में आपने बघेली में अपनी प्रसन्नता की दहाड़ लगाई।
अब बारी थी इस प्रोजेक्ट के भगीरथ शिवराज के सहयोगी रीवा विधायक प्रदेश के मंत्री संयत, संयमी, गंभीर स्वभाव के धनी राजेन्द्र शुक्ल जी की। आपके चेहरे पर बच्चों सी चंचलता आज चमक रही थी जीवन के एक लक्ष्य की प्राप्ति का सुकून था, जो भाव भावनाओं के समुद्र में हिलोरे मारता था जो गौरव अस्मिता वैभव और पहचान का विषय था, उस सपने के साकार होने का यह दिन था। शिवराज और सहयोगियों ने इस गौरवशाली कार्य के लिए पूर्ण सहयोग दिया था आपने सहयोगी साथियों और अधिकारियों की मदद से तय समय पर विन्ध्या के गौरव को वापस लाने में सफलता प्राप्त कर ली थी सभी के लिए आपके प्रति कृतज्ञता का भाव था तो आप उस जनता के प्रति नतमस्तक थे जिसने आपको अपना प्रतिनिधि चुनकर इस गौरवशाली कार्य के सफलता का माध्यम बनाया था किसी ने आपको भगीरथ तो किसी ने आपको हीरो कहा, किसी ने नायक तो किसी ने सूत्रधार कहा सब ने आपके प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की, लेकिन आपने सहज भाव से सबका धन्यवाद किया क्योंकि यह कार्य सबके सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता था और उस जनता विशेष का शुक्रिया किया जिसने इस कार्य के लिए आपको इस लायक बनाया कि आप इस कार्य के माध्यम बन सकें। लाखों की तादात में पहुंची जनता करतल ध्वनि से सभी वक्ताओं को अपना लगातार समर्थन दे रही थी।
नरेन्द्र सिंह तोमर इस खूबसूरत प्रकृति की अनुपम कृति सफेद बाघ और सुंदर प्राकृतिक परिसर की तारीफ करते रहे साथ ही राजेन्द्र शुक्ल के प्रयास की सराहना की जिन्होने प्रदेश को नहीं देश को इस बात का गौरव दिलाया कि यहां विश्व की प्रथम व्हाइट टाइगर सफारी का निर्माण हुआ ।
केन्द्रीय वन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी ने कहा कि इतनी सुंदर सफारी मैने आज तक नहीं देखी सफेद बाघ की अठखेलियों से वह रोमांचित थे विश्व की प्रथम व्हाइट टाइगर सफारी के लिए उन्होने कहा कि जो भी बेहतर से बेहतर सुविधाएं हो सकती हैं उसको देने का हम काम करेंगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को इस अविस्मरणीय कार्य के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
अब बारी थी मुखिया की जिसके संरक्षण में इस कार्य ने मूर्तिरूप पाया था, जो कार्य पूरे विश्व में प्रसिद्ध दिलाने वाला हो, जो कार्य प्रदेश की पहचान हो जो लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय हो, जो रोजगार का सृजन करने वाला हो, उसकी पूर्णता से उपजे आनन्द के भाव की कल्पना सहज ही लगाई जा सकती है। आज प्रदेश मुखिया शिवराज सिंह चैहान अपने सभी साथियों को धन्यवाद दे रहे थे जनता को उसका मान दे रहे थे क्षेत्र को विकास और रोजगार का उपहार दे रहे थे तो लगातार अपने सहयोगी राजेन्द्र शुक्ल की तारीफ कर रहे थे आप खुले मंच से कह रहे थे कि मैं राजेन्द्र शुक्ल जैसा सहयोगी पाकर गदगद हूँ यह राजेन्द्र शुक्ल के परिश्रम की पराकाष्ठा का ही प्रतिफल है कि आज विन्ध्य के गौरव सफेद बाघ अपनी जन्मभूमि में पूरे वैभव के साथ वापस लौटे हैं और इसके लिए विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी का निर्माण कर प्रदेश को विश्व के मानचित्र पर सम्मान मिला है।
विन्ध्य के मान सम्मान को पुर्नस्थापित करने वाली यह विश्व की प्रथम व्हाइट टाइगर सफारी क्षेत्र के विकास में नये पंख लगाएगी रोजगार के अवसरों का सृजन होगा क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि आएगी लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, मान-सम्मान के साथ विकास का यह बहुत बड़ा काम है। जनभावनाओं के प्रति समर्पण का अनुकरणीय उदाहरण विन्ध्य की जनता की मांग के इंतजार का खत्म होना, और सरकार के विकास की कसौटी में खरे उतरने का काम है, विन्ध्य के धरोहर को लौटाने का सपना साकार हुआ है। ऐसे उदगार व्यक्त किये गए ।
अतिथियों और मुख्यमंत्री जी ने आज 3 अप्रैल 2016 को सच ही कहा है कि महाराज मार्तण्ड सिंह जू देव के नाम पर स्थापित यह व्हाइट टाइगर सफारी विन्ध्य के वैभव को स्थापित करने वाला कार्य है ऐसा लगता है कि आज इस व्हाइट टाइगर सफारी के लोकार्पण के साथ ही विन्ध्य के गौरव का पदार्पण भी हो रहा है।

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आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

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अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


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