समाचार

उद्योगों के लिये मप्र में 25 हजार हेक्टेयर का भूमि बैंक


230616n1

9000 हेक्टेयर पूरी तरह सुविधायुक्त
ग्वांगज़ाउ (चीन) में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की उद्योग समुदाय से चर्चा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में नये उद्योगों की स्थापना के लिये 25 हजार हेक्टेयर भूमि का बैंक बनाया गया है। इसमें से 9000 हेक्टेयर क्षेत्र पूरी तरह विकसित और उद्योगों की स्थापना के लिये सुविधायुक्त है। भूमि का चयन ऑनलाइन जियोग्राफिकल इन्फार्मेशन सिस्टम के माध्यम से किया जा सकता है। श्री चौहान आज ग्वांगज़ाउ में होने वाले बिजनेस सेमीनार में चीन के प्रमुखतम उद्योग समूहों और कंपनियों से चर्चा कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं के प्रति चीन की निवेशक कंपनियों के उत्साह को देखते हुए श्री चौहान ने अपनी पूर्व निर्धारित यात्रा एक दिन बढ़ाकर 24 जून को  औद्योगिक शहर शेनज़ेन में उद्योगपतियों से मुलाकात का कार्यक्रम रखा है।

श्री चौहान ने ग्वांगज़ाउ में बिजनेस सेमीनार में डाली फ़ूड कंपनी तथा ओप्पो कपंनी के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने मध्यप्रदेश में निवेश करने के विचार का स्वागत करते हुए कहा निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग मिलेगा। विकास और रोजगार सृजन के लिये निवेश को जरूरी बताते हुए श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिये जरूरी सभी अधोसंरचनाएँ मजबूत कर ली गयी हैं। डाली फ़ूड कंपनी मध्यप्रदेश में निर्माण इकाई स्थापित करने की इच्छुक है। ओप्पो कपंनी ने भी मध्यप्रदेश में हेंडसेट निर्माण में दिलचस्पी दिखाई है। मुख्यमंत्री ने डाली फूड कंपनी के विदेश व्यापार प्रमुख श्री ली यीन से निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने ओप्पो मोबाइल के उपाध्यक्ष श्री झू गैओलिंग से भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने दोनों कंपनियों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक वातावरण और अधोसंरचनाओं को देखने आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने इंदौर में होने वाले वैश्विक निवेश सम्मेलन में भाग लेने के लिये भी आमंत्रण दिया।

श्री चौहान ने चीन की प्रमुख निवेश कंपनी कंट्री गार्डन होल्डिंग के समूह उपाध्यक्ष श्री झिडून वांग से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने ग्वांगडो इलेक्ट्रिकल चेंबर ऑफ कामर्स के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

Have any Question or Comment?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आलेख – अजय नारायण त्रिपाठी

Smiley face

अविस्मरणीय गौरवमयी पल व्हाइट टाइगर सफारी लोकार्पण

मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है बचाने वाले से पालने वाला और जो लाए, बचाए, पाले उसकी बडाई का कहना ही क्या। सन 1976 में रीवा से सफेद बाघ का नाता टूट गया था अंतिम बाघ विराट के न रहने पर पूरा विन्ध्य केवल सफेद बाघ की कहानी गायक बन कर रह गया। राजेन्द्र शुक्ल की तब उम्र केवल 12 वर्ष की थी ऐसा बालमन जो कौतूहलो से भरा रहता है जो खेलना चाहता है, घूमना चाहता है, प्रकृति को आष्चर्य भरी निगाहों से निहारता है और फिर सवाल उठाता है बारिस क्यो होती है? इसका पानी कहां जाता है? बीज से पेड़ कैसे बनते है? जंगल क्यो है? जीव जन्तु क्यो जरूरी है? इन्द्रधनुष कैसे बनता है? पेड़ हरे क्यो हैं? इन सब सवालो के जबाव स्कूलो में मिलने की उम्र भी यह है। इस अवस्था में प्रकृति प्रेमी इस बच्चे ने यह जाना की हमारा क्षेत्र जो सफेद बाघ के गौरव से परिपूर्ण था अब वह विहीन हो चुका है। हम अब कभी सफेद बाघ इस क्षेत्र में नही देख पायेगें सफेद बाघ कैसा होता है अब यह केवल चित्रों के माध्यम से दूसरो को बता पायेंगे या फिर अन्य जगहांे पर जा कर देख पायेगें जहां पर यहीं के सफेद बाघ भेज दिए गए हैं। .. आगे पढ़ें


SuperWebTricks Loading...